संकल्प शक्ति वाले गतिशील सरदार

 वर्ष 1947 के पहले 6 महीने भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण थे साम्राज्यवादी शासन के साथ-साथ भारत का विभाजन भी अपने अंतिम चरण में था तब या तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं थी कि क्या देश का एक से अधिक बार विभाजन होगा कीमतें आसमान पहुंच गई थी खाद्य पदार्थों की कमी आम बात थी। लेकिन सबसे बड़ी चिंता भारत की एकता को लेकर देवभूमि में गृह विभाग का गठन वर्ष 1947 के जून महीने में किया गया किस विभाग का प्रमुख 550 से भी अधिक रियासतों से भारत के साथ उनके रिश्ते के बारे में बातचीत करना था जिनके आकार आबादी भूमि अथवा आर्थिक स्थितियों में काफी बताए थे। उस समय महात्मा गांधी ने कहा था कि राज्यों की समस्या इतनी ज्यादा विकट है कि सिर्फ आप ही इसे सुलझा सकते हैं यहां पर आपसे आशा सरदार वल्लभभाई पटेल से है जिनकी जयंती हम मना रहे हैं समय कम था और जवाबदेही बहुत बड़ी थी लेकिन इसे अंजाम देने वाली शख्सियत कोई साधारण व्यक्ति नहीं बल्कि सरदार वल्लभ भाई पटेल थे जो इस बात के लिए दृढ़ प्रतिज्ञ थे कि वह किसी भी सूरत में राष्ट्र को झुकने नहीं देंगे ।उन्होंने और उनकी टीम ने एक-एक करके सभी रियासतों से बातचीत की सभी रियासतों को आजाद भारत का अभिन्न हिस्सा बनाना सुनिश्चित किया उनकी बदौलत ही आधुनिक भारत का वर्तमान एक मानचित्र हम देख रहे हैं कहा जाता है कि बीपी मैंने स्वतंत्रता मिलने पर सरकारी सेवा से अवकाश लेने की इच्छा की समय आराम करने का नहीं मेनन विदेश विभाग के सचिव बनाए गए।

उन्होंने अपनी पुस्तक द स्टोरी ऑफ द इंटीग्रेशन आफ इंडियन स्टेटस में लिखा है कि किस तरह सरदार बल्लभ भाई पटेल ने इस मुहिम में अग्रणी भूमिका निभाई और अपने नेतृत्व में पूरी टीम को परिश्रम से काम करने के लिए प्रेरित किया उन्होंने लिखा है कि सरदार पटेल के लिए सबसे पहले भारत की जनता के हित थे जिस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता। हमने 15 अगस्त 1947 को नया भारत के उदय का उत्सव मनाया लेकिन राष्ट्र निर्माण कार्य अधूरा था स्वतंत्र भारत के प्रथम गृह मंत्री के रूप में प्रशासनिक ढांचा बनाने का काम प्रारंभ किया जो आज भी जारी है। चाहे या दैनिक शासन संचालन का मामला हो तथा लोगों विशेषकर गरीबों और वंचितों के हितों की रक्षा का मामला हो।

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