पाकिस्तान की शह पर

भारत की शिकायतों को हवा में उड़ा देना अमेरिका और पश्चिमी देशों की पुरानी आदत रही है अब जो शिकायत अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ घनी कर रहे हैं। उन्हें नजरअंदाज करना शायद अमेरिका के लिए भी मुश्किल होगा गुरुवार को वॉशिंगटन की जान हापकिंस यूनिवर्सिटी में वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए उन्होंने पाकिस्तान के बारे में जो कहा उससे पूरी दुनिया के कान खड़े हो जाने चाहिए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान उनके मूल के खिलाफ एक तरह का अघोषित युद्ध लड़ रहा है और वहां लगातार आश्रिता फैला रहा है। अशरफ घानी का या भाषण जिस समय स्कूल ऑफ एडवांस इंटरनेशनल स्टडीज में चल रहा था उस समय वहां बैठे लोगों को या खबर भी मिल गई थी कि अफगानिस्तान के 2 जिलों में गोरी और मनीष दान में नासिर तालिबान ने हल्ला बोल दिया है बल्कि अमेरिका के 30 एल इड कमांडो को भी मार गिराया है उनके हमलों में स्थानीय पुलिस के कई जवान भी मारे गए हैं या अफगानिस्तान का वह इलाका है जिसे अभी तक सबसे सुरक्षित समझा हां और हाजरा आबादी वाले इलाके में तालिबान अपने पांव नहीं पसार सकते हैं। अब खबर यह आ रही है कि तालिबान ने इस इलाके के बहुत से हिस्से पर कब्जा जमा लिया है और बड़ी संख्या में स्थानीय आबादी को घर छोड़कर भागने पर मजबूर कर दिया है हाजरा पारसी और मंगोल मूल के सिया होते हैं जबकि पाकिस्तान समर्थित तालिबान सुननी है और वे वहां लगभग वही खेल खेल रहे हैं। जो पाकिस्तान समर्थित उग्रवादी का चित्र है आश्रम खाने का कहना है कि दोनों देशों में कई बार बात हुई। लेकिन अफगानिस्तान में शांति बहाल करने के लिए पाकिस्तान की कोई दिलचस्पी नहीं है उल्टे हुआ वहां अशांति फैलाने की कोशिश कर रहा है उन्होंने यह भी बताया कि पाकिस्तान के नए प्रधानमंत्री इरफान खान से काफी उम्मीद बांधी गई थी।

लेकिन वह भी पुरानी नीति पर ही चल रहे हैं और उन्होंने अभी तक हालात बदलने के लिए कोई तत्परता नहीं दिखाई हो सकता है क्योंकि यूनिवर्सिटी में बैठे उनके भाषण के श्रोताओं को यह सब नया लगे लेकिन भारत के लोगों के लिए अफगान राष्ट्रपति ने कोई नई बात नहीं कही है। भारत का तो हमेशा से यही कहना रहा है कि पाकिस्तान आतंकवाद को एक विदेश नीति की तरह इस्तेमाल करता है। इसके जरिए वह बड़े पैमाने पर आ रहा है यही वह भारत में करता रहा है और यही वह अफगानिस्तान में कर रहा है।

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