नौसेना में पहली बार परमाणु पनडुब्बी शामिल करने के ऐलान से विश्व सामरिक हलकों में भारत का कद काफी ऊंचा हुआ है। समुद्र के भीतर महीनों छिपी रहकर अरिहंत पनडुब्बी दुश्मन पर घात लगाकर हमला करने में सक्षम होगी इसके विकास की परिकल्पना हालांकि 70 के दशक में ही की गई थी मगर असली काम 90 के दशक में शुरू हुआ ढाई दशक की इसकी विकास कहानी फूलों की तरह है। जहां अभियंताओं से 500 मीटर की गहराई में महीनों चुपचाप बैठकर वह अगले याद रखेगी से बचना दुश्मन के लिए मुश्किल होगा भारत के पास जमीन और आसमान से ही दुश्मन की धरती परमाणु बैलिस्टिक मिसाइल गिराने की क्षमता थी और अब समुद्र के भीतर से भी क्षमता हासिल कर लेने के बाद भारत का प्रमाणित रिकॉर्ड पूरा हो गया जिसकी बदौलत दुश्मन की किसी भी परमाणु हमले का जवाब कुछ मिनटों के भीतर दे सकता है। जमीन पर तैनात अग्नि बैलिस्टिक मिसाइलों और आसमान से किसी लड़ाकू विमान किसे दुश्मन पर परमाणु बम गिराने की क्षमता भारत को पहले ही हासिल हो गई थी पर अब समुद्र के भीतर से भी दुश्मन पर परमाणु मिसाइल गिराई जा सकती है। जमीन और आसमान से परमाणु हथियार चलाने की भारत की क्षमता भले ही दुश्मन पूरी तरह नष्ट करने में कामयाब हो जाए मगर समुद्र के भीतर परमाणु मिसाइल कहां छुप कर रखी गई है।
इसका पता नहीं चल सकेगा। और जब भारत पर परमाणु दुश्मन देश की ओर रवाना कर दिया जाएगा यही अहमियत है पानी न्यूक्लियर ट्रायद की। भारत की सेकंड स्ट्राइक यानी जवाबी हमला रणनीति में अरिहंत परमाणु पनडुब्बी की अहम भूमिका होगी इसके रहते अब दुश्मन देश कभी भी भारत पर परमाणु हमला करने की नहीं सोचेगा। परमाणु अवधारणा कहती है कि भारत कभी किसी देश पर पहले परमाणु हमला नहीं करेगा लेकिन जब कोई हमला कर देगा तो वह सेकंड स्ट्राइक यानी जवाबी हमला करने को स्वतंत्र रहेगा। हालांकि पाकिस्तान और चीन ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से भी जय वादा नहीं किया कि वह युद्ध के हालात में अपने देश पर हमला परमाणु भार नहीं करेंगे लेकिन भारत ने दुनिया के सभी मंचों पर इसे स्पष्ट कहा है।