1857 का विद्रोह - 2

4- नाना साहिब की पेंशन बंद करना -

                                                      नानासहेब पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र था 1852 मे  बाजीराव द्वितीय का मृत्यु हो गई लॉर्ड डलहौजी ने नाना साहब की ₹800000 की वार्षिक पेंशन बंद कर दी और उनकी जागीर को भी जप्त कर लिया लॉर्ड डलहौजी की इस कार्यवाही से नाना साहब ने तीव्र असंतोष उत्पन्न हुआ उसने अंग्रेजों के इस अन्याय पूर्ण कार्रवाई का विरोध करना शुरू कर दिया ।

5- मुगल सम्राट के प्रति अपमानजनक व्यवहार -

                                                                     अंग्रेजों द्वारा मुगल सम्राट के प्रति अपमानजनक व्यवहार किए जाने से भारतीय मुसलमानों में तीव्र आक्रोश था ब्रिटिश गवर्नर जनरल लॉर्ड कैनिंग ने मुगल सम्राट बहादुर शाह को यह चेतावनी दी थी कि उसके बाद बादशाह की उपाधि समाप्त कर दी जाएगी तथा उसके उत्तराधिकारी को लाल किला खाली करके कुतुब के निकट रहना पड़ेगा उसे ₹100000 के स्थान पर ₹15000 मासिक पेंशन स्वीकार करनी होगी इस प्रकार मुसलमानों ने तीव्र आक्रोश व्याप्त था ।

6 - दूषित शासन व्यवस्था -

                                       शासन में केवल अंग्रेजों का बोलबाला था यद्यपि 1833 का चार्टर एक्ट में घोषित किया गया था कि अंग्रेज सरकार द्वारा बिना किसी पक्षपात या भेदभाव के योग्यता के आधार पर भारतीयों को सरकारी पदों पर नियुक्त किया जाएगा परंतु इसका कभी पालन नहीं किया गया अंग्रेजों को भारतीय की योग्यता तथा ईमानदारी पर विश्वास नहीं था अतः उच्च प्रशासनिक पदों पर केवल अंग्रेज नियुक्त किए जाते थे प्रशासन केवल अंग्रेजो के हितों की रक्षा करना अपना प्रमुख कर्तव्य मानता था अंग्रेज अधिकारी अपने को भारतीयों से अलग रखते थे तथा भारतीयों को हर प्रकार से अपमानि करते थे इस प्रकार शासन व शासित के बीच खाई बनती गई ।

7 - जमींदारों ने असंतोष -

                                      जिस तरह गोद निषेध नीति के द्वारा अंग्रेजो ने कई राज्यों का अपहरण किया था उसी तरह उन्होंने जमींदारों पर भी गोद निषेध नीति लागू कर दी उनके जमींदारों की जमीन छीन ली लॉर्ड विलियम बैटिंग ने काफी भूमि का अपहरण किया था अवध के अपहरण के बाद तो उनके तालुकेदार भूमिहीन बन गए अपनी जमीनें छिन जाने से इन जमींदारों की दशा सोचनीय बन गई थी अंग्रेजों के प्रति उनका गहरा रोष था  

                     इस प्रकार अंग्रेजों किस नीति से जमींदारों को अप्रसन्न कर अपना शत्रु बना लिया क्रांति के समय इन असंतुष्ट जमींदारों ने क्रांतिकारियों के धन से बहुत सहायता की ।

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