यूरोपीय आर्थिक समुदाय

इस व्यापारिक संघ का निर्माण फ्रांस, पश्चिमी जर्मन , इटली , बेल्जियम , नीदरलैंड्स तथा लक्सेम्बर्ग द्वारा 1957 ई में रोम में स्वीकृत की गई संधि के आधार पर जनवरी 1958 में किया गया । इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध और उपनिवेशवाद से ग्रसित आर्थिक दशा और व्यापार में आपसी सहकार द्वारा सुधार करना था । बाद में यूनान तथा टर्की भी अपनी आर्थिक स्थिति को सुधारने की गरज से इसके सहायक सदस्य बन गए। सन 1967 में अफ्रीका के 18 देश जिनका किसी   न किसी सदस्य देेश से  ऐतिहासिक सम्बन्ध रहा है । सन 1973 में ब्रिटेन , डेनमार्क और आयरलैंड भी इसके सदस्य बन गए । फलतः अब यह विश्व की वृहत्तम आर्थिक इकाई हो गयी है । विश्व का लगभग 41 प्रतिशत व्यापार इस संघ द्वारा होता है।

इस व्यापार संघ के सदस्य राष्ट्र अपनी वस्तुएं इन देशों में पूरी स्वतंत्रता  के साथ आयात निर्यात कर सकते हैं। इनके आयात निर्यात में  परस्पर कोई परिमाणात्मक नियंत्रण नही है। इस संघ की मुख्य विशेषता उभय मूल्य स्तर तथा विपणन की सामान्य व्यवस्था है। इसके देशो की भौगोलिक आर्थिक एवं सामाजिक समानता है, अतः व्यापार एवं आर्थिक नीतियां एक सी है

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