कंप्यूटर ने वर्तमान में मानव जाति का काम आसान किया है लेकिन इसके रास्ते में कुछ मुश्किलें भी आती हैं जिन्हें वायरस के नाम से जानते हैं। आज हम आपको वायरस के संबंध में संक्षिप्त परिचय देंगे ।

कंप्यूटर वायरस एक प्रकार के इलेक्ट्रॉनिक कोड है जिसका उपयोग कंप्यूटर में समाहित सूचनाओं को समाप्त करने के लिए होता है । इसे कंप्यूटर प्रोग्राम में किसी टेलीफोन लाइन से दुर्भाग्यवश प्रेषित किया जाता है । इस कोड से गलत सूचनाएं मिल सकती हैं, एकत्रित जानकारी नष्ट हो सकती हैं तथा यदि कोई कंप्यूटर किसी नेटवर्क से जुड़ा है तो इलेक्ट्रॉनिक रूप से जुड़े होने के कारण यह वायरस संपूर्ण नेटवर्क को प्रभावित कर सकता है । फ्लापियों के आदान-प्रदान में भी वायरस के फैलने का डर रहता है यह महीनों, सालों तक बिना पहचाने गए ही कंप्यूटर में पड़े रह सकते हैं और उसे क्षति पहुंचा सकते हैं ।इनकी रोकथाम के लिए इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा व्यवस्था विकसित की गई है कुछ मुख्य कंप्यूटर वायरस हैं -  माइकेलएंजलो, डार्क अवेंजर, किलो फिलिप, मैकमग, स्कोर्स , कैस्केड, जेरूसलम, डेटा क्राइम, कोलंबस क्राइम, इंटरनेट वायरस, पैचकॉम, पैच EXE, कॉम EXE, मारिजुआना, मेलिसा, अन्ना कुर्निकोवा, मायडूम, प्वाइजन आईवी, सी ब्रेन, ब्लडी, चेंज मुंगू एवं देसी ।
     • माइकलएंजेलो वायरस सर्वप्रथम 6 मार्च 1993 को देखा गया जिस दिन इसको पाया गया उस दिन इटली के प्रसिद्ध चित्रकार माइकल एंजेलो की पुण्यतिथि थी । अतः इस वायरस का नाम माइकल एंजेलो वायरस रखा गया ।
     • ‎ भारत में पाया गया प्रथम कंप्यूटर वायरस सी ब्रेन है, जो मद्रास(चेन्नई) में 1988 में प्रकट हुआ था ।
     • ‎ भारत में बेंगलुरु की एक कंपनी वायरस विरोधी प्रोग्रामों में विशेष दक्षता रखती है ।

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