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पुरापाषाण काल (पाषाण काल) part 2
इस संस्कृति के उपकरण पुरापाषाण काल की अपेक्षा सूक्ष्म, चिकने और सुंदर हैं। सरायनाहर से 15 शवाधान मिले हैं, जिनमें मृतक का सिर पश्चिम की ओर है। इलाहाबाद की मेजा तहसील की चोपनीमांडो पुरास्थल से झोपड़ियों, मिट्टी के बर्तनों के अवशेष मिले हैं। महदहा स्थल से उपकरणों की साथ-साथ सिल-लोढ़े, गर्त चूल्हे, अस्थि एवं सींग के आभूषणों के साक्ष्य मिले हैं। अतः स्पष्ट है कि पुरापाषाण काल की अपेक्षा इस काल का मानव थोड़े बहुत कृषि एवं पशुपालन करने में तक की अंत्येष्टि करने तथा आग पर भोजन पकाने से परिचित था।
उत्तर प्रदेश में नव पाषाण कालीन सभ्यता के साक्ष्य इलाहाबाद (बेलन घाटी स्थित कोलडिहवा, महगड़ा तथा पंचोह स्थलों) मिर्जापुर - सोनभद्र, प्रतापगढ़ आदि जिलों के विभिन्न स्थलों से प्राप्त होते हैं। इस कॉल के पाषाण उपकरण मध्य पाषाण काल की अपेक्षा अधिक सुक्ष्म, चिकने और तेज हैं बेलन घाटी के 95 साड़ी के स्थलों से झोपड़िया बनाने, कृषि के जाने, मिट्टी के बर्तन बनाने तथा पशुपालन करने के साक्ष्य मिले हैं। अतः स्पष्ट है कि नवपाषाणिक संस्कृति अपनी पूर्वगामी संस्कृतियों की अपेक्षा अधिक विकसित थी । इस काल का मानव कृषि - कर्म के साथ-साथ पशुपालन करना, मिट्टी के बर्तन बनाने तथा उस पर चित्रकारी और पालिश करने, आवास बनाने, जानवरों की खालों से वस्त्र बनाने आदि क्रियाओं से परिचित था।
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