19वी एवं 20 वी शताब्दी में स्त्री शिक्षा

19 वी शताब्दी में समाज मे यह भ्रांति विद्यमान थी कि हिन्दू शास्त्र स्त्री शिक्षा की अनुमति नही देते तथा शिक्षा ग्रहण करने पर देवता उसे वैधव्य का दंड देते है। इस दिशा में सबसे पहला प्रयास ईसाई मिशनरियों ने किया तथा 1819 में कलकत्ता तरुण स्त्री सभा की स्थापना की। 1849 में कलकत्ता एजुकेशनल कॉउन्सिल के अध्यक्ष जे०ई०डी०बेथुन ने बेथुन स्कूल की स्थापना की । बेथुन द्वारा किया गया प्रयास स्त्री शिक्षा की दिशा में कई गयी पहली पहल थी।किन्तु स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में इस्वरचंद्र विद्यासागर की देन महान है। वे बंगाल के कम से कम 35 बालिका विद्यालय से सम्बद्ध थे तथा स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में उनके कार्यो को सदैव याद किया जाएगा। बम्बई के एलफिन्सटन इंस्टीट्यूट के विद्यार्थियों ने भी स्त्री शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दिया।

1854 के चार्ल्स वुड डिस्पैच में भी स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने पर बल दिया गया है। 1914 में स्त्री चिकित्सा सेवा ने स्त्रियों को नर्सिंग एवं मिडवाइफरी के क्षेत्र में प्रशिक्षण देने का महत्वपूर्ण कार्य किया।1916 में जब डी०के० कर्वे ने भारतीय महिला विश्वविद्यालय की स्थापना की तो यह स्त्री शिक्षा की दिशा में मील का पत्थर साबित हुआ। इसी वर्ष दिल्ली में 'लेडी हार्डिंग मेडिकल कॉलेज 'की भी स्थापना की गई।

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