संसाधन की परिभाषा -

संसाधन का अर्थ : - 
वह तत्व या स्रोत जो मानवीय उद्देश्यों तथा आवश्यकताओं की पूर्ति करने में सक्षम है संसाधन कहलाता है। मनुष्य के ज्ञान एवं तकनीक के विकास के साथ-साथ नए-नए संसाधन अस्तित्व में आते हैं जिससे संसाधनों की संख्या बढ़ती जाती है।संसाधन मनुष्य के लिए उपयोगी होते हैं और मानवीय उपयोगिता ही संसाधन का विशिष्ट गुण है किसी वस्तु या पदार्थ को संसाधन की श्रेणी में तभी रखा जा सकता है जब वह मनुष्य की किसी ना किसी आवश्यकता या उद्देश्य की पूर्ति करता हो या करने में समर्थ हो। वास्तव में कोई भी वस्तु या तत्व अपने आप में संसाधन नहीं है बल्कि मनुष्य के लिए उसकी उपयोगिता ही उसे संसाधन बना देती है। किसी वस्तु या या स्रोत की उपयोगिता किसी देश-काल की परिस्थिति के अनुसार मनुष्य की भौतिक, बौद्धिक तथा सांस्कृतिक क्षमता पर निर्भर करती है क्योंकि उसके अनुसार ही मनुष्य उपलब्ध वस्तु या स्रोत का उपयोग करने में सक्षम हो पाता है।अतः प्राविधिक विकास के साथ-साथ संसाधनों की मात्रा में वृद्धि की प्रवृत्ति पाई जाती है

सामान्यतः संसाधन अर्थ केवल मूर्त या गोचर पदार्थों से ही लगाया जाता है किंतु अनेक ऐसे अमूर्त तत्व जो मनुष्य की आवश्यकता की पूर्ति करते हैं। संसाधन की श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। वास्तव में कुछ अमूर्त तत्वों का मानवीय महत्व मूर्त तत्वों से कम नहीं है। मूर्त तत्वों में भूमि, जल, वन, मिट्टी, खनिज, पदार्थ, कृषि उपजे औद्योगिक उत्पादन आदि प्रमुख हैं। मनुष्य का स्वास्थ्य वैज्ञानिक एवं तकनीकी, ज्ञान कार्यकुशलता, सामाजिक संगठन, आर्थिक प्रगति, राजनीतिक स्थायित्व, अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एवं संगठन आदि अमूर्त तत्व किसी भी देश-काल में मनुष्य के लिए उपयोगी है अतः वे भी महत्वपूर्ण संसाधन है। जहां एक ओर कोई वस्तु या पदार्थ अपने में निहित मानव उपयोगिता के कारण ही संसाधन बन पाता है वहीं दूसरी ओर स्वयं मनुष्य भी एक संसाधन है। जो अपने ज्ञान, कार्य कुशलता तथा सामर्थ से अनेक संसाधनों का सृजन करता है।

निर्माण प्रक्रिया के अनुसार संसाधन के मुख्यता दो वर्ग हो सकते हैं - प्राकृतिक संसाधन और मानवीय या सांस्कृतिक संसाधन

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