स्वेज नहर मार्ग का व्यापारिक महत्व अधिक है। यह नहर भूमध्य सागर एवं लाल सागर के बीच स्थित है, जो आंध्र महासागर एवं हिन्द महासागर को जोड़ती है इसका निर्माण 1869 में एक फ्रांसीसी इंजीनियर फर्डिनेन्ट- डी- लेसेप्स द्वारा पूरा हुआ। इसे पूरा होने में 10 वर्ष लगे । इस नहर की लंबाई 165 किमी कम से कम चौड़ाई 60 मीटर तथा गहराई10 मीटर है । 1956 से यह नहर मिस्र के अधीन है। इसके पहले यह ब्रिटेन एवं फ्रांस के अधिकार में थी । स्वेज नहर के भूमध्य सागरीय तट पर पोर्ट सईद बन्दरगाह है। उसके दक्षिण में यह नहर मेंझाला झील को पार करती हुई अलनकतारा , अल्फिरदान और इस्माइलिया नहरी पोताश्रयों तक आने के बाद उसके दक्षिण में स्थित झीलों , बड़ी बिटर झील एवं छोटी बिटर झील को पार करती है। नहर के दक्षिण सिरे पर , जहां यह लाल सागर में मिलती है , पश्चिम स्वेज पोर्ट तौफीक है। इस्माइलिया पर एक मीठे पानी की नहर स्वेज नहर में आकर मिलती है।
यह नहर संयुक्त राज्य अमेरिका तथा पश्चिमी यूरोप के देशों को अफ्रीका-ेेएशियाई देशो से जोड़ती है। इसके निर्माण से पहले जहाज उत्तमाशा अन्तरीप से दक्षिणी अफ्रीका का चक्कर लगा कर जाते थे । स्वेज नहर के बन जाने से मुंबई, न्यूयॉर्क के बीच 45 किमी लिवरपुल -मुम्बई के बीच 7000 किमी की दूरी कम हो गयी । यह नहर एशियाई कच्चे माल के स्रोतों को पश्चिम यूरोप के औद्योगिक देेशों से जोड़ती है