" सामाजिक कारण " -
अंग्रेजों ने भारत में धीरे-धीरे देशी राज्यों को भी नहीं हड़प्पा उन्होंने यहां सभ्यता और संस्कृत को भी नष्ट करना चाहा जिससे सदियों तक भारत उन का गुलाम बना रहे उन्होंने भारतीय सामाजिक व्यवस्था मे भी हस्तक्षेप करना आरंभ किया जो निम्न प्रकार था ।
1- भारतीयों के साथ अपमानजनक व्यवहार -
अंग्रेजों शासक और शासित के बीच एक दीवार खड़ी कर दी अंग्रेजों ने भारतीय से कोई सामाजिक संबंध नहीं रखे वह भारतीयों को घृणा की दृष्टि से देखते थे और उनके साथ पशु तुल्य व्यहार करते थे उन्होंने फूट डालकर हिंदू और मुसलमानों को भी अलग अलग रखा और उन्हें एक नहीं होने दिया उन्होंने भारतीय रीति रिवाजों की अवहेलना कर अपनी सभ्यता को बरबस उन पर ला दिया भारतीयों को सूअर, हब्शी , मूर्तिपूजक आज कह कर पुकारा जाता था तथा उन्हें अपमानित किया जाता था अंग्रेजों द्वारा संचालित होटलों और क्बलो की तख्ती ऊपर लिखा होता था " कुत्ते और भारतीयों लिए प्रवेश वर्जित है " ।
2- अंग्रेजी शिक्षा -
अंग्रेजों ने अंग्रेजी शिक्षा का प्रचार किया परंतु भारतीय जनता ने यह समझा कि अंग्रेज इस बहाने उन्हें ईसाई बनाने का प्रयत्न कर रहे हैं अतः उन्होंने अंग्रेजी शिक्षा का विरोध किया ।
3- ईसाई धर्म का प्रचार -
अंग्रेजी सरकार का प्रोत्साहन पाकर ईसाई धर्म का प्रचार भारत में ईसाई धर्म के प्रचार प्रसार कर रहे थे वह अनैतिक एवं अनुचित तरीके से भारतीय ईसाई बनाने का प्रयास करते थे वे प्रलोभन तथा दबाव द्वारा भारतीयों को ईसाई धर्म में दीक्षित करते थे ईसाई धर्म के बढ़ते हुए प्रभाव से भारतीयों में तीव्र असंतोष व्याप्त था ।