ज्वालामुखी उत्पन्न होने के कारण

  • ज्वालामुखी भूपटल पर वह प्राकृतिक छेद या दरार है जिससे होकर पृथ्वी के अन्दर का पिघला पदार्थ, गैस या भाप, राख इत्यादि बाहर निकलते हैं । पृथ्वी के अन्दर का पिघला पदार्थ, जो ज्वालामुखी से बाहर निकलता है भूराल या लारवा कहलाता है । यह बहुत ही गर्म और लाल रंग का होता है । लावा जमकर ठोस और काला हो जाता है जो बाद में जाकर ज्वालामुखी-चट्टान के नाम से जाना जाता है

  • । लावा में इतनी अधिक गैस होती है कि वह एक ही बार निकल पाती है । लावा में बुलबुले इन गैसों के निकलने के कारण हो उठते हैं । लावा का बहना बंद हो जाने पर कुछ काल तक भाप निकलते देखा जाता ह । पिघली चट्टान को ऊपर लाने में ये गैसें ही सहायक होती हैं मगर यह जरुरी है कि भूपटल पर कहीं कोई कमजोर परत मौजूद हो जिसे तोड़ कर, फाड़कर या छेदकर गैस लावा को ऊपर की ओर रास्ता बनाने में मदद करे ।

  • ज्वालामुखी- विस्फोट होने पर भूकम्प होना स्वाभाविक है ।

  • ज्वालामुखी पृथ्वी की सतह पर उगे हुए फोड़े हैं. ये वहीं फूटते हैं जहाँ की पपड़ी कमजोर होती है, जहाँ इन्हें कोई रास्ता मिल जाता है.” ।

                                      (शेष आगे )

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