स्त्री मृण मूर्तियां अधिक मिलने से सिंधु सभ्यता का समाज मात्र सत्तात्मक थी।
पासा इस जोगी का प्रमुख खेल था। यह लोग योगासन भी करते थे।
सैन्धव सभ्यता कांस्य युगीन सभ्यता थी तथा यहां के लोग लोहे से परिचित नहीं थे।
मोहनजोदड़ो में मिली प्रसिद्ध नर्तकी या देवदासी की कांस्य की प्रतिमा से इस युग में कांस्य का प्रयोग किए जाने का पता चलता है।
हड़प्पा के सामान्य आवास क्षेत्र के दक्षिण में एक ऐसा कब्रिस्तान स्थित था जिसे ‛समाधि आर 37’ नाम दिया गया।
मोहनजोदड़ो नगर के एचआर क्षेत्र से जो मानव प्रस्तर मूर्तियां मिली हैं। चन्हूदड़ो में किसी दुर्ग का अस्तित्व नहीं मिला है।
रोपड़ से एक ऐसा कब्रिस्तान मिला है जिसमें मनुष्य के साथ पालतू कुत्ता भी दफनाया गया था।
कालीबंगा में प्राक सैन्धव संस्कृति की सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धि एक जूते हुए खेत के साक्ष्य मिला है।
राखीगढ़ी भारत में स्थित इस सभ्यता का सबसे बड़ा स्थल है।
सर्वाधिक संख्या में मुहरे मोहनजोदड़ो से प्राप्त हुई हैं। जो मुख्यतः चौकोर हैं।
लोथल व देशलपुर से तांबे की मुहर मिली हैं ।
मोहनजोदड़ो व लोथल से प्राप्त मुहर पर नाव का चित्र मिला है।
हड़प्पा व चन्हूदड़ों से तांबे या कांसे से की बैलगाडियों की आकृति प्राप्त हुई है।