आधुनिक युग में कागज 'सभ्यता की रीढ़' कहा जाता है। कागज बनाने की कला की खोज चीन में 105 ई. में तसैलून ने की थी । लगभग 900 ई. में चीन से यह कला मध्य एशिया होकर यूरोप में फैली । स्पेन तथा इटली में 1150 ई. के आसपास , फ्रांस में 1189 ई. में, जर्मनी में 1231 ई. में तथा इंग्लैण्ड में 1330 ई. में कागज के कारखाने स्थापित किये गए उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य तक रद्दी कपड़े से कागज बनाया जाता था।
लकड़ी की लुगदी से कागज बनाने का कार्य जर्मनी में 1840 ई. तथा संयुक्त राज्य अमेरिका में 1880 में प्रारंभ किया गया। बीसवीं शताब्दी में विश्व का अधिकांश कागज लकड़ी से निर्मित लुगदी से उत्तम किस्म का कागज बनाया जाने लगा । कागज को पुनर्संस्कृत भी किया जा सकता है। आज विश्व का लगभग एक तिहाई कागज रददी कागज को पुनर्चक्रित करके बनाया जाता है। इस प्रकार निर्मित कागज वास्तव में गत्ता होता है। इंग्लैण्ड में उन्नीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में अधिकांश कागज एस्पार्रटो घास से बनाया जाता था, जो उत्तरी अफ्रीका तथा स्पेन से आयात किया जाता था। करेंसी मेंं प्रयुक्त होने वाले उत्तम किस्म के विशिष्ट कागज ' बाओबाब ' नामक वृक्ष की छाल से बनाया जाता है।