4- सामाजिक प्रथाओं पर प्रतिबंध -
अंग्रेजों ने सती प्रथा , शिशु - हत्या , बाल - विवाह आदि को बंद करने के लिए कदम उठाया तथा विधवा विवाह को न्याय संगत ठहराया उस समय के कट्टरपंथी हिंदुओं ने इस बात का घोर विरोध किया इस सामाजिक सुधारों से देश की जनता ने सोचा कि ब्रिटिश सरकार उन्हें धर्म भ्रष्ट कर ईसाई बनाना चाहती है जब लॉर्ड डलहौजी ने रेल , तार एवं डाक व्यवस्था की तो भारतीयों ने सोचा कि इन कार्यों के द्वारा अंग्रेजी सरकार उनके समाज और धर्म पर प्रहार कर रही है ब्रिटिश इतिहासकार व राजनीतिक ने जानबूझ कर यह तर्क दिए कि रूढ़िवादी , परंपरावादी तथा अनपढ़ लोग ने ब्रिटिश साम्राज्य के विभिन्न प्रगतिशील सामाजिक सुधार का सही मूल्यांकन नहीं करने के कारण उन्हें विद्रोह की भावना भर गई लेकिन वहां वास्तविकता यह नहीं थी बल्कि विरोध का मूल कारण यह था कि ऐसे समय में लागू किए गए जबकि भारतीय जनता की आर्थिक कठिनाइयां बढ़ती जा रही थी तथा ईसाई धर्म का प्रचार किया जा रहा था ।
इन सब बातों से भारतीयों में असंतोष फैला हुआ था और वह अंग्रेजों के इन कामों शंका का की दृष्टि से देखते थे ।
5- भारतीय संस्कृति का उपहास -
अंग्रेज लोग हिंदू देवी देवताओं को ही नहीं मोहम्मद साहब को भी अपमानित किया करते थे मूर्ति पूजा का उपहास किया जाता था भारतीय रीति रिवाजों को निकृष्ट बताया जाता था तथा उनकी सभ्यता एवं संस्कृति पर कीचड़ उछाला जाता था इस कारण भी भारतीयों में तीव्र आक्रोश था ।