पौधे के अंगों में अपस्थानिक जड़ें

इन जोड़ों का निर्माण मुलायम पुर से ना होकर पौधे के किसी दूसरे भाग से हो जाता है या कई प्रकार की होती हैं जैसे तंतु में जड़े यह जड़ें तने की आधार से निकल कर रेशा जैसी हो जाती हैं कंदील जड़े यह जड़े तने के आधार से निकलकर जमीन में चली जाती हैं और भोज्य पदार्थ इकट्ठा करने लगती हैं जैसे शकरकंद में और स्तंभ मूल हिजड़े होती हैं जो तने से मिलकर जमीन में आ जाती हैं और तने को सहारा देती हैं जैसे बरगद , जटामूल जडे तने के आधार से निकलकर चक्रीय क्रम में होकर तने को सहारा देती है जैसे मक्का और गन्ने में, आरोही जड़े कमजोर तने के पर्वसंधियों से निकलकर तनु की सहारा देती है जैसे पान के पौधे में और मनी प्लांट में, पर्ण मूल चढ़े पति से निकलती हैं और इस पत्ती से नया पौधा बना लेती हूं जैसे अजूबा में होता है, परजीवी जडे़ं दूसरे पौधे से भोजन पानी लेती हैं जिससे अमरबेल पौधे में, श्वसन मूल जड़े दलदल स्थानों में पाए जाने वाले मैग्रो वनस्पतियों में मिलती हैं यह ऑक्सीजन की खोज में जमीन को फाड़कर ऊपर आ जाती है, प्रकाश संश्लेषण हरे रंग की होती हैं और भोजन बनाते हैं जैसे सिंघाड़ा और गुर्ज।
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