भारत मे कोककारी तथा अन्य प्रकार के अच्छी किस्म के कोयले के भण्डार अधिक नहीं है। किन्तु ये काफी लंबे समय के लिए पर्याप्त हैं। कुछ वर्ष पहले यह अनुमान लगाया गया था कि अच्छी किस्म तथा कोककारी कोयले के भण्डार जो 0.50 मीटर अथवा अधिक मोटे संस्तरो में 600 मीटर की गहराई तक थे, उनकी मात्रा 10685.7 करोड़ टन थी । कोककारी कोयले के भण्डार केवल 1674.2 करोड़ टन ही आंके गए थे। ध्यान रहे कोककारी कोयला ही धातुकर्मी कार्यों में प्रयुक्त किया जाता है। यदि खनन के आधुनिक तरीके अपनाए जाते है तो कुल धातुकर्मी कोयले के तीन चौथाई भाग को निकाला जा सकता है। वर्तमान खनन की दर से इसके भण्डार अधिक लम्बे समय तक नहीं चलेंगे। इस निराशाजनक स्थिति को ध्यान में रखते हुए सरकार इस कोयले के संरक्षण तथा इसके उपयोग को केवल धातुकर्मी उद्देश्यों के लिए ही सीमित करने के लिए पग उठा रही है और अधिक अनुसंधान के बल पर शायद घटिया प्रकार के कोयलो का भी धातुकर्मी में प्रयोग हो सके।
यहाँ यह उल्लेखनीय है कि जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया ने कुछ समय पूर्व ही कुछ नए कोयला क्षेत्रो की खोज की है। इन कोयला क्षेत्रो में गहरी खुदाई करने पर पता चला है कि इनमें अतिरिक्त कोयले के भंडार विद्यमान हैं। 1 जनवरी 2004 को 1,200 मीटर की गहराई तक भारत के कुल कोयले के भंडार 24,569.3 करोड़ टन थे। भारत के कुल कोयला भण्डार के 60 प्रतिशत घटिया किस्म के थे, जिनमे राख की मात्रा 25 प्रतिशत से अधिक थी।