तना

तना पौधे का वह भाग होता है जिसका निर्माण बीज के बोर्ड के प्रगुण से होता है और जिस पर स्वयं एवं पूर्वसंध्यिया पाई जाती तना अपने ऊपर कलिकाऐं उत्पन्न कर के पत्तियों को धारण करता है तने के प्रकार इस प्रकार हैं 

जैसे प्रकंद अदरक हल्दी पीला फल आदि के पौधों में तथा कंद आलू में धन कंद और भी जमीकंद आदि पत्ता गोभी अपने भोजन का संग्रह पत्तियों में करते हैं और इसका का कायिककलिका भाग खाया जाता है।और फूलगोभी का पुष्पक्रम भाग खाया जाता है लौंग का पुष्पकलिका भाग खाया जाता है । तथा केशर के फूल का वर्तिकांग  भाग खाया जाता है।

पौधो के पोषण - पौधे का विकास और वृद्धि के लिए कुल 17 तत्वों की जरूरत पड़ती है जिनमें से जिस तत्व की आवश्यकता ज्यादा मात्रा में होती है उसे दीर्घ मात्रक और उसकी आवश्यकता लघु मात्रा की होती है उसे लघु मात्रक कहलाता है। दीर्घ मात्रक के एलिमेंट जैसे कार्बन हाइड्रोजन ऑक्सीजन नाइट्रोजन सल्फर पोटेशियम कैल्शियम मैग्नीज आदि।

Hydroponics method -: इस प्रकार की वैज्ञानिक विधि में सभी आवश्यक तत्वों के घोल से विना मृदा के प्रयोग के पौधों को उगाने का कार्य किया जाता है।

क्रान्तिक तत्व - भारत की मिट्टी ओं में N,P,K कि कमी होती है और रासायनिक खाद्य देते समय इन्हीं तत्वों का विशेष तौर पर इस्तेमाल किया जाता है। इसके कारण पौधे में अच्छे प्रकार की वृद्धि देखने को मिलती है।

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