यह सबसे उत्तर की श्रेणी है। इसे हिमाद्रि , उच्च हिमालय, बर्फीला हिमालय आदि नामों से भी जाना जाता है। यह पश्चिम में सिन्धु नदी के मोड़ से लेकर पूर्व में ब्रह्मपुत्र नदी के मोड़ तक लगभग 2,500 किमी. की लम्बाई में टेढ़ी मेढ़ी रेखा की तरह फैला हुआ है । इसकी औसत ऊँचाई 6000 मीटर तथा चौड़ाई 40 किमी. है । इस श्रेणी में 100 से अधिक चोटियां सदैव हिमाच्छादित रहती हैं। विश्व का सर्वोच्च शिखर एवरेस्ट इसी भाग में स्थित है इस चोटी का नाम हिमालय क्षेत्र के सर्वप्रथम सर्वेक्षण विभाग के संचालक एवरेस्ट के नाम पर रखा गया। इस चोटी पर सर्वप्रथम चढ़ने के श्रेय शेरपा तेनजिंग तथा एडमण्ड हिलेरी को है जिन्होंने 29 मार्च , 1953 को कर्नल जान हण्ट के नेतृत्व में एवरेस्ट पर अपना विजय ध्वज फहराया। इस खण्ड की अन्य प्रमुख चोटिया कंचनजंघा, मकालू, धौलागिरी, मनसालू नंगा पर्वत , अन्नपूर्णा , गोसाई थान , नन्दादेवी आदि हैं। उच्च हिमालय का ढाल सिन्धु एवं ब्रह्मपुत्र की घाटियों की ओर धीमा किन्तु दक्षिण की ओर तीव्र है। इसलिए चौड़ी घाटियां इस भाग में कम पाई जाती हैं। इसमे वलन एवं भ्रंशन के स्पष्ट प्रमाण उपलब्ध हैं। इसके अधिकांश बाह्य भाग में अवसादी चट्टाने किन्तु श्रेणी के आंतरिक भाग में कायांतरित चट्टाने पायी जाती हैं। इस श्रंखला के बीच मे कश्मीर घाटी है जो कि निक्षेपित झीलों से निर्मित है।