मुगल सम्राट जहांगीर की एक तस्वीर, ईसा पूर्व 3500-2800 का एक टेराकोटा बर्तन

         मुगल सम्राट जहांगीर की एक तस्वीर

मुगल शासक जहांगीर की तस्वीर, जिसमें वो अपने हाथों में मरियम की तस्वीर लिए हैं. इसे वॉटरकलर और सोने की मदद से कागज पर उकेरा गया है. प्रदर्शनी में ये तस्वीर उत्तर प्रदेश से लाई गई है.

मुगल सम्राट जहांगीर की वो चित्र, जिसे डच आर्टिस्ट रेम्ब्रांदट ने बनाया था.

लकड़ी का चरखा अंग्रेज़ों के ख़िलाफ़ भारत की आज़ादी की लड़ाई का शक्तिशाली प्रतीक बन गया था. इसे महात्मा गांधी ने भारतीयों में आत्मनिर्भर होने की भावना जगाने के लिए अपनाया था. उन्होंने स्वराज, स्वशासन और ब्रिटिश सामानों के बहिष्कार करने के लिए लोगों से इसे रोज कातने की सलाह दी और प्रोत्साहित किया था.

इस चरखे को मुंबई की मणि भवन से लाया गया है, जो 17 सालों तक महात्मा गांधी के राजनीतिक आंदोलन का मुख्यालय रहा.

ये प्रदर्शनी सीएसएमवीएस, मुंबई और नेशनल म्यूज़ियम दिल्ली और ब्रिटिश म्यूज़ियम लंदन के सहयोग से आयोजित की जा रही है.

     ईसा पूर्व 3500-2800 का एक टेराकोटा बर्तन

ऊपर तस्वीर में दिख रहा 'बलूचिस्तान पॉट' (3500-2800 ईसा पूर्व) टेराकोटा से निर्मित है. यह मेहरगढ़ में मिला था. अब पाकिस्तान में स्थित बलूचिस्तान प्रांत में स्थित नवपाषाण स्थल है. इस क्षेत्र में मिले अन्य बर्तनों की तरह ही यह कई रंगों से रंगा है. कई रंगों में रंगने की कला प्राचीन संस्कृति में आम थी.

खाना पकाने और सामान रखने के साथ ही इनका इस्तेमाल पारंपरिक रस्मों में भी किया जाता था. ऐसे मर्तबान कब्र में भी पाए गए

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