बक्सर के युद्ध के पश्चात ,रॉबर्ट क्लाइव ने बंगाल में द्वैध शासन की सुरुआत की जिसमे दीवानी और निज़ामत दोनों कंपनी के नियंत्रण में आ गए। कंपनी ने दीवान के रूप में दीवानी अधिकारों का और डिप्टी सूबेदार को नियुक्त करके निज़ामत अधिकारों का प्रयोग किया। कंपनी ने मुग़ल शासक से दीवानी कार्य हासिल किये और निज़ामत कार्य बंगाल के सूबेदार से प्राप्त किये।
द्वैध शासन इसलिए कि प्रशासनिक दायित्व तो बंगाल के नवाब पर था,जबकि राजस्व वसूली का दायित्व कंपनी पर। प्रशासन की रीढ़ अर्थ या वित्त होता है, किन्तु 1765 ईसवी के अगस्त महीने में स्थापित द्वैध शासन व्यवस्था के अनुसार कर वसूली का अधिकार कंपनी को मिला, जबकि प्रशासन नवाब के हाथों में बने रहने दिया गया। सबसे बड़ी बात यह है कि नवाब और कंपनी दोनों की अलग अलग स्वतंत्र सत्ता थी।।दीवानी का अधिकार प्राप्त हो जाने से कंपनी की स्थिति में आमूलचूल परिवर्तन हो गया। दीवानी का कार्य मालगुजारी के साथ साथ आंशिक तौर पर न्याय करना भी था। प्रमुख दीवानी कार्यालय मुर्शिदाबाद और पटना में स्थापित किये गए।