" आर्थिक कारण "
1- आर्थिक शोषण-
अंग्रेजों के आगमन से पूर्व भारत में देसी नरेश थे चाहे वह हिंदू हो या मुसलमान यह भारत भूमि को अपनी मातृभूमि समझते थे जो कुछ वह प्रजा से किसी भी रुप में लेते थे उसे वही खर्च करते थे घूम फिर कर पैसा वापस यथास्थान पहुंच जाता था ऐसे लोग कृषको और श्रमिकों की दशा को भी उन्नत करने का प्रयास करते थे व्यापार व्यवसाय के विकास की और उनका ध्यान रहता था इसलिए उनके समय में कभी किसी के सामने आर्थिक संकट नहीं आया और विभिन्न करो एवं लगान आदि से भी भारत का अब काफी धन विदेश जाने लगा अंग्रेजों ने भारतीय उद्योग धंधे को नष्ट कर बेकरी फैलाई और लोगों के जीवन विपिन्न बनाया भारत में इंग्लैंड का बना माल खपा कर इंग्लैंड को मालदार बनाया गया उन्होंने भारतीयों से उनकी जमीन जायदाद छीन ली जनता को लूटा और उन्हें सब तरह दुखी और दयनीय बना दिया गया भारत को जितना अंग्रेजों ने शोषण किया तथा आज ऐसा विश्व के इतिहास में अंन्रत्र नहीं मिलेगा ।
इस आर्थिक शोषण की प्रतिक्रिया सन 1857 की क्रांति के रूप में होनी ही थी ।
2- उद्योग धंधे का विनाश -
अंग्रेजों ने अपने आर्थिक हितों की पूर्ति के लिए भारत के कुटीर उद्योगों को नष्ट कर दिया उन स्वाथपूर्ण नीति के कारण भारत में वस्त्र उद्योग चौपट हो गया भारतीय सुती रेशमी वस्त्रों पर भारी कर लगाया गया पहले तो भारत में सूती और रेशमी कपड़ा इंग्लैंड जाना बंद हो गया इंग्लैंड से बना हुआ कपड़ा रखकर बाजार में बेचा जाने लगने से भारत के वस्त्र उद्योग नष्ट होता चला गया भारत में कच्चा माल सस्ते मूल्य पर खरीद कर इंग्लैंड पहुंचाया गया तथा इंग्लैंड से बना हुआ सामान भारत की मंडियों में ला कर बेचा जाने लगा इससे भारत में लाखों कारीगर , जुलाहे , शिल्पकार आदि बेकार हो गये ।