वातावर्णीय प्रदूषण

प्राकृतिक द्वारा जीवन को जीने के लिए वातावरण प्रदूषण में रहना जहर की भांति काम करता है और तो इसका प्रभाव जो शरीर पर पड़ने लगता है उसे प्रदूषण कहा जाता है जो पदार्थ या परिवर्तन करते हैं उससे प्रदूषक पदार्थ कहा जाता है प्रदूषक पदार्थ वे पदार्थ होते हैं जिससे कई भागों में वर्तीकाग्र का आग्रह किया जाता है जो इस प्रकार है कि सहकारी सहकारी में हुए पदार्थ होते हैंजो इस प्रकार के प्रदूषण पदार्थ वातावरण में बहुत कम समय तक रहते हैं फिर नष्ट हो जाते हैं जैसे जली लकड़ी कागज मृत शरीर चौड़ा कूड़ा करकट आदि।

अक्षयकारी पदार्थ वं पदार्थ होते हैं जो इस प्रकार के प्रदूषण पदार्थ वातावरण में लंबे समय तक प्रदूषण का कारण बने रहते हैं जिसे शीशा पारा पॉलिथीन आदि।सु रा में प्रदूषण होते हैं जो इस प्रकार के प्रदूषण पदार्थ मानव द्वारा बनाए जाते हैं इसमें सभी कीटनाशक दवाइयां का यूज़ होता है मात्रात्मक प्रदूषण में प्रदूषण होते हैं जो यह प्रदूषण पदार्थों को वातावरण में होती है लेकिन इसकी मात्रा बढ़ने पर प्रदूषण का कारण बनते है ।

पृथ्वी के चारों ओर एक वायुमंडल है यह गैस का मिश्रण से बना हुआ है जिसमें 78‌‌% नाइट्रोजन 0.93%  21% ऑक्सीजन 0.3 पर्सेंट जलवा 0.03 पर्सेंट कार्बन डाइऑक्साइड के अलावा सूक्ष्म जीव भी है धूल परागकण कण  भी होते हैं।

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