मेसोपोटामिया सभ्यता व हड़प्पा सभ्यता में सम्बद्धता

फारस की खाड़ी के उत्तर में स्थित आधुनिक इराक को प्राचीन में मेसोपोटामिया कहा जाता था। यूनानी भाषा के दो शब्दों मेसो और पोटा मिया से बना है। मेसो का अर्थ मध्य व पोटामिया का अर्थ नदी होता है। इस प्रकार मेसोपोटामिया का अर्थ दो नदियों के बीच का प्रदेश है। यह दो नदियां दजला और फरात थी। इन नदियों के मुहाने पर सुमेरियन,मध्य में बेबीलोनियन तथा उत्तर में असीरियन सभ्यता में विकसित हुई थी।दिलमुन अर्थात फारस खाड़ी स्थित बहरीन को हाथियों का देश कहा गया है। यहां से व्यापार होता था।

                        समानताएं                                   1- दोनों नगरी सभ्यताएं थी।

2- दोनों के निवासी कांसे व तांबे के साथ-साथ पाषाण के लघु उपकरणों का प्रयोग करते थे।

3- दोनों के भवन कच्ची तथा पक्की ईंटों से बनाए गए थे।

4- दोनों सभ्यताओं के लोग चाक पर मिट्टी के बर्तन बनाते थे।

5- दोनों को लिपि का ज्ञान था।

उपर्युक्त समानताओं के आधार पर ह्वीलर ने सैंधव सभ्यता को सुमेरियन सभ्यता का एक उपनिवेश बताया है।

                       असमानताएं

1- सिंधु सभ्यता के नगरों में मुख्यतः पकाई गई ईटों का व्यवहार हुआ था जबकि सुमेरी नगरों में कच्ची ईंटों का प्रयोग हुआ था।

2- सुमेरी और सिंधु लिपि भी एक दूसरे से भिन्न थे।

3- सुमेरी लिपि कीलनुमा थी तो सिंधु लिपि चित्रात्मक सांकेतिक थीं।

4- हड़प्पा लिपि में 400 चिन्ह है, जबकि सुमेंरी लिपि में 900 चिह्न थे।

5- सुमेर में मंदिरों व पुरोहितों का महत्वपूर्ण स्थान रहा था परंतु सिंधु घाटी सभ्यता में मंदिरों का अस्तित्व संदेहास्पद था।

विशेष :       सुमेरियन सभ्यता के लोग प्राचीन विश्व के प्रथम लिपि अविष्कर्ता थे। उनकी क्यूनीफार्म लिपि सामान्यतः प्राचीनतम लिपि मानी जाती है।

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