गांधीजी 9 जनवरी 1915 को भारत वापस लौटे (इसी उपलक्ष में प्रवासी दिवस 2003 से) और अहमदाबाद के कोचरर नामक स्थान पर जीवनलाल बैरिस्टर के मकान को किराए पर लेकर 25 मई 1915 को सत्याग्रह आश्रम की स्थापना की लेकिन शीघ्र ही यह आश्रम प्लेग की चपेट में आया और इसका स्थान परिवर्तन कर साबरमती नदी के तट पर ले जाया गया । तभी से आश्रम साबरमती का आश्रम तथा गांधीजी साबरमती के संत कहलाए ।
भारत की राजनीति में प्रवेश :-
गांधी जी भारत पहुंचकर राजनीतिक गतिविधियों का मूल्यांकन कर गोपाल कृष्ण गोखले को अपना राजनीतिक गुरु मानते हुए कांग्रेस के 1915 में अधिवेशन में कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की । इनके नेतृत्व में पहला आंदोलन चंपारण सत्याग्रह 1917 था । गांधी जी के आगमन से पूर्व जो भी कृषक आंदोलन हुए सब सीमित क्षेत्र सीमित मुद्दों के लिए हुए जो आपस में बिखरे हुए थे । जिसे गांधीजी संगठित कर एक राष्ट्रव्यापी स्वरूप प्रदान किया जिसने गांधी जी को शीघ्र महत्वपूर्ण बनाया ।