Global warming - वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड की अधिकता के कारण जब भी पृथ्वी गर्म होने लगती है तो उसे ग्रीन हाउस इफेक्ट कहा जाता है इस गैस के अलावा मेंथेन ऑन नाइट्रस ऑक्साइड गैस से भी जिम्मेदार है। एकाकलन के अनुसार 2050 तक पृथ्वी के तापमान में 4 डिग्री सेंटीग्रेड की वृद्धि होने वाली है यदि ऐसा होता है तो ध्रुवों के ग्लेशियर पिघलने लगेंगे तो यह चल समुद्र के आएगा जिसके कारण समुद्री तटीय शहर जलमग्न हो जाएंगे जैसे मुंबई चेन्नई विशाखापट्टनम विदेशी शहर लंदन पेरिस अमेरिका का लांगऐगिल्स भी खतरा में है।
जब ऑक्सीजन और नाइट्रोजन की ऑक्साइड की अधिकता हो जाती है तो यह चल वास की क्रिया करके क्रमश आईएस 2s उपचार और अम्लीय वर्षा में विलीन हो जाता है जमीन पर गिरने लगता है तो उसे अम्लीय वर्षा कहते हैं इसका पीएच मान चार से पांच होता है यह वर्षा जीव जंतु और वनस्पतियों के लिए हानिकारक है इस वर्ष से खुली मूर्तियां और संगमरमर की मकानी भ्रष्ट हो जाती है उसे स्टोन लेप्रोसी का रोग कहा जाता है इसी वर्षा से ताजमहल को खतरा है या वर्षा सबसे पहले स्वीलेन देश में हुई थीआ।आजकल इस वर्षा से नार्वे ग्रीनलैंड जर्मनी व कनाडा के कुछ भाग प्रभावित हैं।