गुप्त काल में सांस्कृतिक विकास के कला एवं स्थापत्य

गुप्त काल को भारतीय कला एवं संस्कृति का स्वर्ण युग माना जाता है

इस काल का विभिन्न प्रकार की कलाओं यथा मूर्ति कला चित्रकला वास्तुकला संगीत एवं नाट्य कला तथा मुद्रा कला के क्षेत्र में आशातीत उन्नत हुई बहुतायत में देवताओं की मूर्तियों का निर्माण हुआ मूर्तियों में विष्णु शिव पार्वती ब्रह्मा बुध तथा जैन तीर्थंकरों की मूर्तियों का निर्माण हुआ सारनाथ की बुद्ध मूर्ति मथुरा की वर्धमान महावीर की मूर्ति विदिशा की वराह अवतार की मूर्ति झांसी की शेषशाई  की मूर्ति काशी की गोवर्धन धारी कृष्ण की मूर्ति आदि युग में मूर्तिकला के प्रमुख उदाहरण है।

गुप्तकाल में बनी दो मीटर से भी ऊंची बुद्ध की मूर्ति भागलपुर के निकट सुल्तानगंज में पाई गई है फरहान   ने 25 मीटर से अधिक ऊंची बुद्ध की मूर्ति देखी थी लेकिन उसका पता नहीं बामियान (अफगानिस्तान )की मूर्तियां भी इसी काल में से संबंधित है

अजंता एवं पाक की गुफाओं के चित्र इस युग की चित्रकला के सर्वोत्तम उदाहरण है अजंता की चित्रकारी के जातक कथाओं को नियुक्त किया गया है जो बौद्ध धर्म से संबंधित है मध्य प्रदेश के धार जिले में विंध्य पर्वत को काटकर बाग की गुफाओं का निर्माण हुआ यह गुफाएं धर्मनिरपेक्ष एवं अलौकिक है वास्तुकला के अंतर्गत इस युग में विभिन्न मंदिर गुफा चैत्य विहार टू तथा अटलांटिका ओं के युक्त वैभवशाली नगरों का निर्माण हुआ इनके बनाने में पत्थरों का पक्की ईंटों का प्रयोग किया गया था झांसी स्थित देवगढ़ का दशावतार का मंदिर कानपुर स्थित भीतरगांव का मंदिर नागौर स्थित भूमरा शिव देव का मंदिर आदि इस युग की वास्तुकला के सर्वोत्तम उदाहरण है।

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