गुप्त काल में सांस्कृतिक विकास के साहित्य एवं शिक्षा

गुप्त युग में साहित्य शिक्षा का क्षेत्र अत्यधिक उन्नत हुई काशी मथुरा नासिक पद्मावती उज्जैनी अवरपुर पल्लवी पाटील पुत्र तथा कांची आज गुप्त युग के प्रमुख शैक्षिक केंद्र थे हिंदू बौद्ध तथा जैन साहित्य युग में लिखा गया रामायण महाभारत का वर्तमान स्वरूप इसी युग में प्राप्त हुआ पुराण नारद व बृहस्पति मूर्तियां तख्तियां व अन्य धर्म शास्त्र इसी युग में रचे गए ईश्वर कृष्ण ने संख्या कार्य की रचना की संस्कृत साहित्य में कालिदास कुमारसंभव मेघदूत अभिज्ञानशकुंतलम मालविका अग्निमित्र आज की रचना कि उन्हें भारत का शेक्सपियर कहा जाता है गुप्त काल की प्रमुख रचनाएं हैं।

कालिदास का  अभिज्ञानशकुंतलम विश्व की एक उत्कृष्ट एवं साहित्यिक कृतियों में से एक है।इसमें राजा दुष्यंत तथा शकुंतला के प्रेम की कथा चित्रित है इसका पुत्र भरत नामी राजा था अभिज्ञानशाकुंतलम् प्रथम भारतीय रचना है जिसका अनुवाद यूरोपीय भाषाओं में हुआ ऐसी दूसरी रचना है -  भगवतगीता

भास के 13 नाटक इसी काल के हैं

शुद्रक लिखा नाटक मृच्छकटिकम् माटी की खिलौना गाड़ी, जिसमें एक निर्धन ब्राह्मण के साथ एक वेश्या का प्रेम प्रसंग वर्णित है। प्राचीन नाटकों में सर्वोउत्कृष्ट कोटि का माना गया है।

गुप्त काल में लिखे नाटकों के बारे में 2 बातें और लिखनी है पहले कि यह सभी नाटक सुखान्त है दुखान्त नाटक एक भी नहीं मिलता दूसरी बात यह है कि उच्च वर्गों के लोग निम्न निम्न भाषाएं बोलते हैं इन नाटकों में स्त्री और शूद्र प्राकृत बोलते हैं जबकि भद्रजन संस्कृत।

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