1857 का विद्रोह - 10

6- सामान्य सेवा भर्ती अधिनियम -

                                                 1856 में अंग्रेजी सरकार ने सेवा भर्ती अधिनियम पास किया जिसके अनुसार भारतीय सैनिकों को विदेशों में युद्ध के लिए भेजा जा सकता था इस अधिनियम से भारतीय सैनिकों में असंतोष उत्पन्न हुआ क्योंकि अनेक सैनिक विदेश जाना अपने धर्म के विरुद्ध मानते थे ।

               "  तत्कालीन कारण "

       1856 में भारतीय सैनिकों ने एनफील्ड नामक नई राइफल दी गई इन राइफलों में विशेष प्रकार के कारतूस प्रयोग में लाया जाते थे जिनको चिकना करने के लिए गाय तथा सूअर की चर्बी का प्रयोग होता था अतः हिंदु तथा मुसलमान सैनिकों ने इस कारतूस का प्रयोग करने से इंकार कर दिया ।

              29 मार्च 1857 को बैरकपुर की अंग्रेजी सेना की 34 वीं रेजीमेंट के भारतीय सैनिक मंगल पांडे ने इन कारतूस उपयोग प्रयोग करने से इंकार कर दिया और उसने तो अंग्रेज अधिकारियों को घायल कर दिया मंगल पांडे को बंदी बना लिया गया तथा 8 अप्रैल 1857 को उसे फांसी की सजा दी गई 34 वीं रेजीमेंट भंग कर दी गई इस प्रकार इन करतूतों का विरोध करने के कारण लखनऊ की अवध रेजीमेंट भी भग कर दी गई ।

             शीघ्र ही विद्रोह की चिंगारी अनेक सैनिक छावनी में फैल गई 9 मई 1857 को मेरठ में लगभग 85 भारतीय सैनिकों को जेल में बंद कर दिया जाए क्योंकि उन्हें चर्बी लगे करतूतों का प्रयोग करने से इंकार कर दिया इस पर अन्य भारतीय सैनिक भड़क उठे और उन्होंने 10 मई 1857 के विद्रोह का झंडा खड़ा कर दिया उन्होंने  कई अंग्रेज अधिकारियों और सैनिकों को मार डाला तथा अपने साथियों को छुड़ा लिया इसके पश्चात क्रांतिकारियों ने मेरठ में प्रस्थान कर 11मई  1857 को दिल्ली पर अधिकार कर लिया और बहादुर शाह भारत का सम्राट घोषित कर दिया ।

         

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