भारत की उत्तर पश्चिमी सीमा पर अफगानिस्तान राज्य अवस्थित था। उनीसवीं शताब्दी के उत्तरार्द्ध में रूस तीव्र गति से पूर्व दिशा की ओर बढ़ रहा था। धीरे धीरे वह अफगानिस्तान और फारस की सीमा तक पहुंच गया। यह स्थिति ब्रिटिश साम्राज्य के लिए खतरे का संकेत थी।रूस द्वारा भारत पर आक्रमण का अनुमान लगाकर रूस से भारत की सुरक्षा हेतु अंग्रेजों द्वारा दो प्रकार की नीतियां बनाई गई-
1- अग्रगामी विचारधारा
2- कुशल अकर्मण्यता
अग्रगामी विचारधारा की नीति के तहत अंग्रेजों नव अफगानिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप किया और परिणामस्वरूप अफगान अमीरों के बीच दो युद्ध लड़े गए। कुशल अकर्मण्यता की नीति का पालन वायसरॉय लार्ड लॉरेंस से लेकर वायसरॉय लार्ड नॉर्थब्रूक तक किया गया। प्रथम अफगान युद्ध मे अंग्रेजों को काफी हानि उठानी पड़ी थी। इसलिए उसे कुशल अकर्मण्यता की नीति को अपनाना पड़ा था। भारत की ब्रिटिश सरकार ने समय समय पर दोनों ही नीतियों का पालन किया।
इसके आगे हम प्रथम अफगान युद्ध की चर्चा करेंगे-