लौह एवं इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry)
- सीमेन्ट उद्योग (Cement Industry)
- कोयला उद्योग (Coal Industry)
- पेट्रोलियम उद्योग (Petroleum Industry)
- कपड़ा उद्योग (Cloth Industry)
- रत्न एवं आभूषण उद्योग (Gems and Jewellery Industry)
- चीनी उद्योग (Sugar Industry)
लौह एवं इस्पात उद्योग (Iron and Steel Industry)
लौह इस्पात उद्योग का महत्त्वः यह उद्योगअर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। इसकेमहत्त्व को स्वीकार करते हुए पं- जवाहरलालनेहरू ने कहा था कि, ‘लौह एवं इस्पात उद्योगआधुनिक सभ्यता का आधार है।’
लौह इस्पात उद्योग की प्रारंभ से अब तक कीस्थिति (तालिका):
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क्र-सं-
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उद्योग
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स्थापनावर्ष
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स्थान
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1.
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बंगाल आयरन वर्क्सकम्पनीः ब्रिटिश संस्थाद्वारा खोला गया एवंअसफल रहा।
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1870
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झरिया केनिकटकुलटीनामकस्थान(पश्चिमबंगाल)
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2.
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टाटा आयरन एंड स्टीलकम्पनी (TISCO)
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1907
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सिंहभूमिजिलाजमशेदपुर(झारखंड)
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3.
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इंडियन आयरन एवंस्टीलकम्पनी (IISCO): TISCO & IISCO निजी क्षेत्र कीकम्पनी थी जिसकीस्थापना का श्रेयजमशेदजी नोशेरवानजी टाटा को जाता है।
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1919
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हरिपुरनामकस्थान(आसनसोलबंगाल)
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4.
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विश्वेश्वरैया आयरन एंडस्टील वर्क्सः सार्वजनिकक्षेत्र की पहली इकाई
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1923
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भद्रावतीनामकस्थान, मैसूर(कर्नाटक)
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स्वतंत्रता के समय से भारत में उपरोक्त तीनोंस्टील प्लान्ट कार्यरत हैं।
वर्ष 1955 में 3 बड़े स्टील प्लान्ट लगाने केसमझौते किए गए।
- भिलाई स्टील प्लान्ट (वर्तमान मेंछत्तीसगढ़)—सोवियत संघ के सहयोग सेस्थापित
- राउरकेला स्टील प्लान्ट (उड़ीसा में)—पश्चिमी जर्मनी के सहयोग से स्थापित
- दुर्गापुर स्टील प्लान्ट (प- बंगाल में) —ब्रिटेनके सहयोग से स्थापित
उपरोक्त तीनों सार्वजनिक क्षेत्र के कारखानों मेंउत्पादन कार्य 1956 (II FYP) से प्रारंभ हुआ।
- तीसरी पंचवर्षीय योजना में सोवियतसंघ (USSR) के सहयोग से बोकारो (अबझारखंड में) में एक और स्टील प्लान्ट कीस्थापना का कार्य प्रारंभ हुआ।
- चौथी पंचवर्षीय योजना में सलेम(तमिलनाडु), विशाखापत्तनम (आंध्र प्रदेश) एवं विजय नगर (कर्नाटक) में नए इस्पातकारखाने स्थापित कर उत्पादन क्षमता मेंवृद्धि करने का प्रयास किया गया।
- पांचवीं पंचवर्षीय योजना में सरकार नेभारतीय स्टील अथॉरिटी (Steel Authority of India—SAIL) की स्थापना 1974 में कीतथा इसे भारत में इस्पात उद्योग के विकासकी जिम्मेदारी दी गई।
नोटः 14 जुलाई, 1976 में ISSCO का स्वामित्वसरकार ने अपने हाथ में ले लिया तथा इसकाविलय SAIL में कर दिया गया जिसे 1 अप्रैल, 2005 से प्रभावी माना गया है। वर्तमानमें SAIL के स्वामित्व में निम्नलिखित सार्वजनिकक्षेत्र हैं:
Durgapur, Rourkela, Bokaro, Burahpur Steel Plant, Alloy Steel Plant, Durgapur, Salem Steel Plant, Maharshtra Electrosmelt Ltd. (mini iron plant) and Visvesvaraya Iron and Steel Ltd.
- वित्तीय वर्ष 2006–07 से 2010–11 केदौरान क्रूड स्टील (कच्चा इस्पात) केउत्पादन में 84% की चक्रवृद्धि वार्षिकदर (Compound Annual Rate) से वृद्धिहुई।
- विश्व स्टील एसोसिएशन (World Steel Association—WSA) के ताजा आंकड़ों केअनुसार वर्ष 2010 में भारत में इस्पातउत्पादन 68.3 मिलियन टन रहा।
- ताजा आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011 मेंइस्पात उत्पादन के क्षेत्र में शीर्ष 4 देश है—(1) चीन, (2) जापान,
(3) अमेरिका, (4) भारत।
- 26 जुलाई, 2011 को पांचवें भारतीयइस्पात शिखर सम्मेलन (नई दिल्ली) मेंकेंद्रीय इस्पात मंत्री बेनी प्रसाद वर्मा नेइस्पात उत्पादन का लक्ष्य 2020 तक 150 मिलियन टन करने का लक्ष्य रखा है (2013 तक 120 मिलियन टन पहुंचने कीसम्भावना है)।
- इस उद्योग में लगभग ₹ 90,000 करोड़ कीपूंजी लगी हुई है और 5 लाख से अधिकलोगों को प्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिल रहाहै।
प्रमुख योजनाएं (Main Planning)
- विशाखापत्तनम इस्पात परियोजनाः
- दक्षिण में आंध्र प्रदेश केविशाखापत्तनम बंदरगाह के पासस्थापित है (तट के निकट स्थापितभारत की पहली इस्पात योजना)।
- इस संयंत्र की वार्षिक क्षमता 30 लाखटन क्रूड स्टील की है। अगस्त, 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री पी- वी-
नरसिंह राव ने यह संयंत्र राष्ट्र कोसमर्पित किया।
- पोस्को की इस्पात परियोजनाः ओडिशा मेंजगतसिंहपुर में 12 मिलियन टन सालनाक्षमता वाली दक्षिण कोरिया कीकम्पनी POSCO की महत्त्वाकांक्षी योजनाहै। इस योजना में ₹ 51 हजार करोड़ केनिवेश के लिए पोस्को इस्पात कम्पनी औरओडिशा सरकार के मध्य वर्ष 2005 मेंसमझौता हुआ जिसकी मंजूरी 2007 में दीगई। पर्यावरणविदों के भारी विरोध केचलते 2010 पर इस योजना पर रोक लगादी गई तथा मीन गुप्ता की अध्यक्षता में 4 सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इससमिति की संस्तुति को स्वीकार हुए 31 जनवरी, 2011 को इसे पर्यावरणीय मंजूरीदी गई। 30 मार्च, 2012 में राष्ट्र हरितन्यायाधिकरण (Nation Green Tribunal) ने पुनः इस पर रोक लगा दी है।
नोटः वर्ष 2014 में पोस्को की इस्पात योजना कोकार्य करने की मंजूरी दे दी गयी।