भारत तथा इसके निकटवर्ती क्षेत्रो में भूकम्पों के वितरण है इसमें तीन क्षेत्र स्पष्ट रूप से आते हैं। पहला क्षेत्र उत्तर में है जिसमे सभी भूकम्पों के अधिकेंद्र स्थित हैं। यही भारत मे भूकम्पों का प्रमुख क्षेत्र है जहां सभी भूकम्प उत्पन्न होते हैं इसके दक्षिण में एक लंबा और अपेक्षाकृत संकीर्ण क्षेत्र है जिसमे गंगा तथा सिन्धु नदियों के मैदान तथा राजस्थान के अधिकांश भाग सम्मिलित हैं। यह वह क्षेत्र है जहां प्रथम क्षेत्र में उत्पन्न भूकम्प से भीषण हानि हुई है अथवा होने की सम्भावना है। सबसे दक्षिण में एक विस्तृत भाग है जिसमे गुजरात छोड़कर लगभग पूरा प्रायद्वीप भारत सम्मिलित है, जहां भूकम्प होने की सम्भावना कम है और जो पृथ्वी का एक स्थिर भू भाग है।
स्पष्ट है कि भारत के भूकम्प सभी तक्षणी वर्ग के हैं, और इनका सम्बन्ध हिमालय की नवीन मोड़दार पर्वतमाला से है। विशाल भूसंचलन ने इस पर्वत माला का निर्माण किया था , और तभी तक इस क्षेत्र में स्थिरता नही आ सकी है और भूपटल में भ्रंश होते रहते हैं जिसके कारण इसके किसी भी भाग में भूकम्प आने की बराबर सम्भावना रहती है । सबसे अधिक खतरा उत्तर पश्चिम तथा उत्तर पूरब कोनो पर है , क्योंकि यहां पहाड़ो की श्रंखला मुड़ते हैं और भूपटल की चट्टानों में विकृति तथा प्रतिबल हैं।