राजकोषीय विकास की समीक्षा -
आर्थिक सर्वेक्षण के अनुसार वर्ष 2017 -18 में राजकोषीय घाटा 3.2% रहने का अनुमान है
रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2018 -19 में आर्थिक वृद्धि दर 7 से 7.5% रहेगी जबकि कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें चिंता का विषय है
प्रत्यक्ष कर अदायगी के लक्ष्य प्राप्ति के आसार लगाए गए है।
मौद्रिक प्रबंधन और वित्तीय मध्यस्थता -
पिछले साल 2017- 18 जनवरी तक के दौरान मौद्रिक नीति अगस्त में केवल एक नीति दर में कटौती के साथ स्थिर रही ।
जनवरी 2018 तक मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी)की 5 बैठकें आयोजित की जा चुकी है।
दिवाला और दिवालियापन प्रक्रिया के लिए एक नयाा परिस्थितिकी तंत्र 2017 - 2018 तक स्थापित किया गया ।
बैंकिंग क्षेत्र की एनपीए समस्या को हल करने के लिए आईबीसी तंत्र सक्रिय रूप से इस्तेमाल किया जा रहा है।
इस अवधि में शेयर मार्केट ने भी नई ऊंचाइयों को छुआ है ।
कीमते एवं मुद्रास्फीति -
वर्ष 2017 - 2018 की अवधि के दौरान देश में मुद्रास्फीति में नमी जारी रही।
अप्रैल से दिसंबर 2017 -2018 वर्ष के दौरान मुद्रास्फीति 33% के आसपास रही।
खाद्य उत्पादों विशेषकर सब्जियों एवं दालों की कीमतों में कमी से मुद्रास्फीति में कमी बरकरार रही।
2017 18 बजट वर्ष के दौरान अप्रैल - दिसंबर में खाद्य मुद्रास्फीति में 1.2% की गिरावट दर्ज की गई।
इस बजट वर्ष में विभिन्न राज्यों ने ग्रामीण एवं शहरी स्थल पर मुद्रास्फीति में गिरावट दर्ज की।