मनुष्य अपने लिए भोजन जुटाने, रहने के लिए मकान के निर्माण, दवा निर्माण के लिए कारखाने खोलने, श्रृंगार तथा विलासिता के साधन जुटाने, वस्त्र निर्माण, आवागमन हेतु मार्ग बनाने, खेती के लिए जमीन जुटाने, सिंचाई के लिए नहर बनाने, विद्युत तथा आवागमन जैसे दूसरे कई महत्वपूर्ण कार्यों को पूरा करने अधिक-से-अधिक वनों की कटाई करके इनको नष्ट किया है।
वनों की उपयोगिता को देखते हुए इसके संरक्षण हेतु निम्न उपाय-
1. वनों के पुराने एवं क्षतिग्रस्त पौधों को काटकर नए पौधों या वृक्षों को लगाना।
2. नए वनों को लगाना या वनारोपण अथवा वृक्षारोपण।
3. आनुवंशिकी के आधार पर ऐसे वृक्षों को तैयार करना, जिससे वन संपदा का उत्पादन बढ़े।
4. पहाड़ एवं परती जमीन पर वनों को लगाना।
5. सुरक्षित वनों में पालतू जानवरों के प्रवेश पर रोक लगाना।
6. वनों को आग से बचाना।
7. जले वनों की खाली परती भूमि पर नए वन लगाना।
8. रोग-प्रतिरोधी तथा कीट-प्रतिरोधी वन वृक्षों को तैयार करना।
9. वनों में कवकनाशकों तथा कीटनाशकों का प्रयोग करना।
10. वन-कटाई पर प्रतिबंध लगाना।
11. आम जनता में जागरूकता पैदा करना, जिससे वह वनों के संरक्षण पर स्वरफूर्त ध्यान दें।
12. वन तथा वन्यजीवों के संरक्षण के कार्य को जन-आंदोलन का रूप देना।
13. सामाजिक वानिकी को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
14. शहरी क्षेत्रों में सड़कों के किनारे, चौराहों तथा व्यक्तिगत भूमि पर पादप रोपण को प्रोत्साहित करना।