1. वन अधिनियम, 1927- यह अधिनियम वनों, वन उपज के अभिवहन और इमारती लकड़ी और अन्य वनोपज पर उदग्रहणीय शुल्क से संबद्ध विधि के लिए पारित किया गया है। यह अधिनियम 1 नवंबर, 1956 से पूर्व बिहार, मुंबई, दिल्ली, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पंजाब, उत्तर प्रदेश तथा पश्चिमी बंगाल में लागू था।
2. वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980- यह अधिनियम वनों के संरक्षण, उनसे जुड़े हुए मामलों, उसके सहायक या आनुषंगिक विषयों के लिए उपबंध करने हेतु पारित किया गया।
यह अधिनियम जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत में लागू है। इसे 25 अक्टूबर, 1980 से लागू किया गया। यह अधिनियम अविवेकी अरक्षण और वन भूमि के कार्यों के दिक्परिवर्तनों को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया था।
वन (संरक्षण) एक्ट 1980 को कानून तोड़ने वालों के विरुद्ध संयुक्त अलंघनीय पैनल विधानों (Coroporation Strieter Panf Provision) के लिए 1988 में संशोधित किया गया। महत्वपूर्ण संशोधन निम्न प्रकार हैं-
क - राज्य सरकार या अन्य प्राधिकारी किसी को आदेश नहीं दे सकता कि कोई भी वनभूमि चाहे पट्टे द्वारा या किसी अन्य तरीके से, व्यक्ति, महानगरपालिका या एजेंसी संगठन (सरकार द्वारा न अपनाई गई हो) के बिना केंद्रीय सरकार के पहले मंजूरी दे सकता।
ख - वन भूमि या कोई हिस्सा जो पेड़ों से साफ हो, जो कुदरती ढंग से उगे थे, उस भूमि या हिस्से पर, उस भूमि का उफयोग पुनः वन-रोपण के लिए केंद्रीय सरकार की पहले मंजूरी के बिना नहीं हो सकता।
ग - वर्तमान में बिना जंगल के जमीन का अभिप्राय उसके कार्यों (Non-forest Purpose) का क्षेत्र अन्य भागों तक विस्तृत किया गया है, जैसे- चाय, कॉफी, रबड़, ताड़, औषधीय पौधे इत्यादि।
3. वन (संरक्षण), अधिकार नियम, 1981-
यह नियम वनों के संरक्षण के संबंध में बनाया गया है। इसका विस्तार जम्मू-कश्मीर राज्य को छोड़कर संपूर्ण भारत में है। इस नियम के अंतर्गत वनों की सुरक्षा के लिए एक समिति के गठन तथा समिति के संचालन संबंधी नियमों के परिप्रेक्ष्य में किया गया है। इसके अनुसार एक समिति में निम्न सदस्य होंगे-
1. महानिरीक्षक (वन) अध्यक्ष
2. अतिरिक्त महानिरीक्षक वन सदस्य
3. संयुक्त आयुक्त, भूसंरक्षण वन सदस्य
4. तीन पर्यावरणविद् (अशासकीय) सदस्य
5. डिप्टी कमिश्नरी जनरल, वन सदस्य (सचिव)
4. पशु अतिचार अधिनियम, 1871- (Cattle Trsopass Act, 1871) – यह अधिनियम पशुओं द्वारा अतिचार से संबंधित विधि को समेकित और संशोधित करने के लिए पारित किया गया है।