नदी बेसिन संपूर्ण नदी अपवाह क्षेत्र के लिए बनाई जाने वाली परियोजना होती है । उदाहरण के लिए यदि कावेरी नदी बेसिन के लिए योजना बनाई जाए तो केरल और कर्नाटक के पठारी भागों में पशुपालन एवं तमिलनाडु व पांडिचेरी के मैदानी भागों में कृषि का विकास किया जा सकता है। इस प्रकार सम्पूर्ण बेसिन क्षेत्र में रहने वाले लोग लाभान्वित होंगे । इसलिए अब कमान क्षेत्र के स्थान पर नदी बेसिन विकास की अवधारणा पर अधिक बल दिया जा रहा है।
ऐसी परियोजना के सफल कार्यान्वयन के लिए बेसिन के जल संसाधनों का सर्वेक्षण जरूरी है परंतु मुख्य समस्या यह है कि विभिन्न नदियां कई राज्यों से होकर बहती हैं एवं राज्य जल संसाधनों के बारे में भ्रामक सूचनाएं दे सकते हैं। साथ ही राज्य सूची का विषय होने के कारण जल संसाधनों के बंटवारे व उसके उपयोग करने के तरीकों के बारे में विवाद हो सकते हैं । अतः नदी बेसिन परियोजना को लागू करने के लिए व इसकी प्रभाविता को बढ़ाने के लिए नदी जल को राष्ट्रीय सूची का विषय बनाने की ओर पहल जरूरी है । वर्तमान समय में 23 वृहद नदी बेसिन व 200 लघु नदी बेसिन हैं जिन्हें पदानुक्रमित करते हुए विकास की योजनाएं बनाई जा सकती है । वाटर शेड विकास वस्तुतः नदी बेसिन की ही छोटी इकाई के अंतर्गत आता है जिसमे 5000 हेक्टयर क्षेत्र की भूमि सम्मिलित की जाती है।