जल विद्युत एक नवीकरणीय, पर्यावरण मैत्रीपूर्ण तथा ऊर्जा का सस्ता साधन है । भारत में जल विद्युत का विशाल विभव है । आर्थिक समीक्षा 2007 -2008 के अनुसार भारत मे अनुमानित 150000 मेगावाट से भी अधिक की अनुप्रयोजित हाइड्रो पावर की संभावना है । लेकिन आज की तारीख तक केवल 21.14% क्षमता विकसित की गई है और 9.53% क्षमता विकसित की जा रही है।
ब्रह्मपुत्र बेसिन में देश का सर्वाधिक जल शक्त्ति विभव (30.3%) मौजूूद हैै। इसके पश्चात प्रयद्वीपीय भारत की पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (10.6%) तथा मध्य भारत की नदियों के विभव (10.4%) आते हैं।
हिमालय क्षेत्र में देश का लगभग ।आधा जल शक्ति विभव मौजूद है। यहां अधिक वर्षा , गहरा हिमाच्छादन तीव्रगामी सदवाहनी नदियां तथा बांध बनाने के लिए उपयुक्त स्थानों की सुविधाएं प्राप्त है। किंतु विशप धरातल तथा उपभोग के केंद्रों से दूरी के कारण जल शक्ति का विकास सीमित ही हुआ है। पश्चिमी घाट एवं प्रायद्वीप का मध्यवर्ती उच्चभूमियो में मध्यम विभव मिलता है जबकि राजस्थान , गुजरात तथा उत्तरी मैदानों में जल शक्ति का निम्न विभव पाया जाता है।
भारत में प्रथम जल संयन्त्र 1897 में दार्जिलिंग में 130 किलोवाट क्षमता की स्थापित की गई । इसके बाद 1902 में कावेरी नदी पर शिवसमुद्रम कर्नाटक में जल विद्युत केंद्र स्थापित हुआ । स्वतंत्रता के बाद देश मे अनेक बहुउद्देश्यीय एवं नदी घाटी परियोजनाएं स्थापित की गई । सन 1975 में जल विद्युत के विकास के लिए के लिए राष्ट्रीय जल विद्युत निगम की स्थापना की गई।