गुलाम वंश और उसके महत्वपूर्ण शासक भाग-3

                        रजिया सुल्ताना

इल्तुतमिश के बाद रुकनुद्दीन फिरोज सुल्तान बना । इसके समय सत्ता की वास्तविक बागडोर इसकी मां शाह तुरकान के हाथ में थी जो कि एक क्रूर महिला थी यही कारण है कि शाह तुरकान के षड्यंत्र के कारण कई तुर्क अमीरों की हत्या हुई ।
रजिया लाल वस्त्र धारण कर शुक्रवार के दिन नमाज के समय एक भीड़ को संबोधित की उसी आक्रोशित भीड़ के कारण सत्ता परिवर्तन की स्थिति निर्मित हो गई। उसी समय रुकनुद्दीन फिरोज जो दिल्ली से बाहर गया हुआ था।  वापस आ जाने पर उसकी हत्या कर दी गई और इस प्रकार 1236 ईस्वी में रजिया सुल्ताना घोषित हुई।

रजिया सत्ता प्राप्त करने के बाद दरबार में पुरुषों के राजशाही वस्त्र पहनकर दरबार में आने लगी। रजिया को यह बात स्पष्ट समझ में आने लगी कि दरबार में तुर्कों की शक्ति को संतुलित करने के लिए गैर तुर्की दलों को बढ़ावा देना चाहिए इसलिए रजिया ने अभीसीनिया के निग्रो को अमीर-ए-आखूत घोषित किया ।
रजिया के काल में कई प्रांत पतियों ने विद्रोह भी किया सबसे पहला विद्रोह लाहौर के इक्तादार कबीर खान ने किया था ।
भटिंडा के इक्तादार अल्तूनिया ने भी विद्रोह किया था वैसे तो रजिया ने लाहौर के विद्रोह का दमन कर दिया था लेकिन जब रजिया भटिंडा के विद्रोह का दमन करने गई तो वहां के अमीरों ने रजिया के विरुद्ध विद्रोह कर दिया और वजीर जुनैदी  के कारण अल्तूनिया रजिया के महल पर हमला करने में सफल हो गया परिस्थिति को विपरीत देखते हुए रजिया जान बचाकर वहां से भागी और अंततः हरियाणा के कैथल में एक जाट किसान  द्वारा या डाकुओं के झुंड के द्वारा रजिया की हत्या कर दी गई रजिया के पतन के मुख्यतः दो कारण माने जाते हैं ।
पहला -तुर्की अमीरों की बढ़ती हुई शक्ति 
दूसरा- मिनहाज उस सिराज के अनुसार रजिया की असफलता का कारण उसका स्त्री होना था।

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