सौर ऊर्जा प्रदूषण मुक्त एवं एक अक्षयशील स्रोत है । भारत सामान्यतया एक उष्ण कटिबन्धीय देश होने के कारण प्रतिवर्ष लगभग 5000 ट्रिलियन किलोवाट घण्टा सौर ऊर्जा प्राप्त करता है । देश के अधिकांश भाग में वर्ष में 300 दिन खुली धुपयुक्त होती है। यहां 20 मेगावाट प्रति वर्ग किमी स्थल क्षेत्र पर सौर ऊर्जा उत्पादन करना सम्भव है । ज्ञातव्य है कि राजस्थान सौर ऊर्जा के विकास हेतु एक आदर्श प्रदेश है ।
सौर ऊर्जा का उपयोग अनेक उद्देश्यों के लिए किया जाता है जिसमे घरेलू ऊष्मन , स्थान ऊष्मन डिस्टिलेशन संयन्त्र, एयरकंडीशनिंग , रेफ्रिजरेशन खाना बनाना आदि सम्मिलित हैं। वर्तमान समय में इसे सौर तापीय तथा सौर फोटोवोल्विक से प्रयोग में लाया जा रहा है। फोटोवोल्टाइक तकनीकी सूर्य के प्रकाश को विद्युत में बदल देती है। सौर तापीय प्रणाली में सौर ऊर्जा को संग्राहकों तथा रिसीवरों की सहायता से तापीय ऊर्जा में बदला जाता है। देश मे सोलर फोटोवोल्टाइक सिस्टम ग्रामीण तथा दूरस्थ क्षेत्रों में जहां ग्रिड शक्ति उपलब्ध नही है देश मे इस सोलर कुकर , सौर पी. वी. पम्प , सौर जल तापन प्रणाली कार्यरत है।
भारत की पहली सौर ऊर्जा इकाई की स्थापना पंजाब के अमृृतसर में की गई है। इसकी स्थापना क्षमता 2 मेगावाट है।