भूकंप से तात्पर्यः---

जिस स्थान से भूकंप का कंपन प्रारंभ होता है उसे भूकंप मूल कहते हैं तथा जहां पर भूकंपीय लहरों का अनुभव सबसे पहले किया जाता है उसे भूकंप केंद्र कहते हैं।
भूकंपीय लहरों को तीन श्रेणियों में रखा गया है।
👉प्राथमिक तरंगे (P तरंगे) -यह सर्वाधिक वेगवान होती है और इस  सिस्मोग्राफ स्टेशन पर सबसे पहले पहुँचती है यह ठोस, द्रव एवं गैस में यात्रा कर सकती है। ये तंरगे ध्वनि तरंगों के समान हैं।

👉द्वितीयक तरंगें या अनुप्रस्थ तरंगे (S तरंगे)-
ये प्रकाश तरंग के समान है ।
ये प्राथमिक तरंगों के बाद उत्पन्न होती है ।
ये तरल में प्रवाहित नहीं हो सकती।
 
👉धरातलीय तरंगे (Lतरंगें)-
 इनका वेग सबसे कम होता है।
 ये सर्वाधिक विनाशकारी होती है ।
 साधारण भूकंप की गहराई 0 से 50 किलोमीटर होती है।
मध्यवर्ती भूकंप की गहराई 50 से 250 किलोमीटर तथा अत्यधिक गहराई वाली भूकंप की गहराई 250 से 700 किलोमीटर होती है। 
भूकंप आने के पूर्व वायुमंडल में रेडान गैस की अधिकता हो जाती है।
L तरंगे पृथ्वी के उपरी भाग में भ्रमण करती है। प्रशांत महासागर तटीय पेटी में विश्व के 63% भूकंप आते हैं। 
समान भूकंपीय तीव्रता वाले स्थानों को मिलाने वाली रेखा को आसोसिसमल  लाइन कहते हैं।
एक ही समय पर आने वाले भूकंप क्षेत्रों को मिलाने वाली रेखा को होमोसिस्मल  line कहते हैं। 
भूकंप लेखी मापक मुख्यताः मारकेली रिएक्टर स्केल है।
रिएक्टर स्केल एक गणितीय मापक है,जिसकी तीव्रता 0 से 9 तक होती है प्रत्येक बिंदु दूसरे बिंदु की तीव्रता का 10 गुना अधिक तीव्रता रखता है।
अतः सागरीय भूकंप द्वारा उत्पन्न लहरों को सुनामिस कहा जाता है ।
सुनामी शब्द जापानी भाषा से संबंधित है।

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