ब्रिक्स (ब्राजील, रूस, भारत और चीन, दक्षिण अफ्रीका) की शुरूआत 2001 में गोल्डमैन सैक्स के अर्थशास्त्री जिम ओ 'नील, द्वारा की गई थी। ब्राजील, रूस, भारत और चीन की अर्थव्यवस्थाओं के विकास की संभावनाओं पर एक रिपोर्ट, जो वैश्विक उत्पादन और जनसंख्या के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करती है। इस सफल निर्णायक पहल में देशों और उनके शासनाध्यक्षों के स्तर पर वार्षिक शिखर सम्मेलनों के माध्यम से चर्चा की गई। पहला शिखर सम्मेलन 2009 में येकातेरिनबर्ग (रूस) में आयोजित किया था जिसमें ब्रिक्स देशों ने गहराई से आपस में संवाद किया। 2011 में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन दक्षिण अफ्रीका में करने के साथ इसका विस्तार किया गया और यह ब्रिक्स बन गया। संक्षिप्त में कहा जाए तो इन देशों की पहचान अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था में एक उभरते हुए राजनीतिक-कूटनीतिक इकाई के रूप में बनी जहां वित्तीय बाजारों का अनुरूप मूल अवधारणा से अलग था।
येकातेरिनबर्ग शिखर सम्मेलन के बाद, पांच वार्षिक शिखर सम्मेलनों (ब्रासीलिया, 2010, सान्या, 2011, नई दिल्ली, 2012, डरबन, 2013, और फ़ोर्टालेज़ा, 2014, उफ़ा (रूस), 2015 ) का आयोजन किया जा चुका है जबकि अगला सम्मलेन भारत में 2016 में आयोजित किया जायेगा । सदस्य देशों के नेताओं द्वारा कम से कम एक वार्षिक बैठक का आयोजन किया गया है। डरबन में शिखर सम्मेलनों का पहला चक्र पूरा कर लिया गया है। अभी तक प्रत्येक सदस्य देश के नेताओं ने बैठक की मेजबानी कर ली है। आम सहमति के क्षेत्रों में इस अवधि के दौरान ब्रिक्स को एक वृद्धिशील ढंग से विकसित किया गया है। इसके सदस्य देशों ने आम सहमति के क्षेत्रों में दो मुख्य स्तंभों को मजबूत करने पर जोर दिया है जो हैं:
(I) आर्थिक और राजनीतिक प्रशासन पर ध्यान देने के साथ बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय; और (ii) सदस्यों के बीच सहयोग। पहले स्तंभ के बारे में बात की जाए तो इसके तहत वैश्विक शासन के ढांचे, विशेष रूप से आर्थिक और वित्तीय क्षेत्रों में सुधार लाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं। जी -20, अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष, विश्व बैंक जैसी संस्थाएं इस तरह के सुधारों पर विशेष जोर दे रही हैं और इसके साथ-साथ राजनीतिक संस्थाओं, जैसे-संयुक्त राष्ट्र ने भी सुधारों पर जोर दिया है।
इंट्रा-ब्रिक्स सहयोग को भी प्रमुखता मिल रही है और एक व्यापक एजेंडा विकसित किया गया है, जिसमें वित्त, कृषि, अर्थव्यवस्था और व्यापार, अंतर्राष्ट्रीय अपराध का मुकाबला करने, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, स्वास्थ्य, शिक्षा, कॉर्पोरेट और शैक्षिक संवाद तथा सुरक्षा जैसे क्षेत्र शामिल हैं। इस संदर्भ में, एक नए मोर्चे के रूप में वित्तीय क्षेत्र के सहयोग पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अपने छठे शिखर सम्मेलन के दौरान ब्रिक्स ने एक नए ब्रिक्स विकास बैंक की स्थापना की जिसका लक्ष्य बुनियादी ढांचे और ब्रिक्स देशों की सतत विकास परियोजनाओं तथा अन्य विकासशील देशों को वित्तीय मदद प्रदान करना था। नई संस्था की स्थापना 50 बिलियन अमेरिकी डॉलर की पूंजी के साथ शुरू की गई।
समझौतों और समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर:-
सहयोग पर इस समझौता ज्ञापन ("एमओयू") पर ब्रिक्स देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका) ने हस्ताक्षर किए जिसमें क्रमश: निम्नलिखित निर्यात ऋण बीमा एजेंसियों को शामिल किया गया है: