बायोमास ऊर्जा

जैव ऊर्जा , ग्रामीण ऊर्जा संकट को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। यह ऊर्जा का एक स्वच्छ तथा सस्ता स्रोत है जो सफाई तथा स्वास्थ्य में सुधार करता है । महिलाओं के कामो की नीरसता कम करता है तथा कृषि के लिए जैविक खाद तैयार करता है इसे पशुओं के गोबर , मानव मल रसोई के अपशिष्ट नगरीय अपशिष्ट तथा फसलों के अवशेष पदार्थो से प्राप्त किया जा सकता है।

   भारत में प्रतिवर्ष लगभग 1000 मिलियन टन फसल अवशेष तथा 300-400 मिलियन टन पशुओं का मल उपलब्ध है। इन पदार्थों से 70,000 मिलियन घनमीटर मीथेन गैस प्राप्त हो सकती है इसके अतिरिक्त नाइट्रोजन , फास्फेट, पोटैशियम, कम्पोस्ट खाद भी प्राप्त होगी।

देश मे बायोमास सहउत्पादन तथा अपशिष्ट से बिजली उत्पादन की अनुमानित क्षमता क्रमशः 66000 एवं 7000 मेगावाट है। ज्ञातव्य है कि भारत में बायोमास से ऊर्जा प्राप्त करने के संयन्त्र पंजाब के झालखरी में , दिल्ली के तिमारपुर में , मुम्बई तथा पोर्टब्लेयर में स्थापित किये गए हैं बायोमास से इथेनॉल मिथेनॉल जैसे तरल ईधन भी बनाये जाते हैं जिससे वाहन चलाये जाते हैं।बायो डीजल के स्रोत के रूप में रतनजोत एवं गन्ने से प्राप्त शोरे पर बल दिया जा रहा है।  राष्ट्रीय बायोगैस विकास परियोजना से ग्रामीण क्षेत्रों में घरेलू ऊर्जा की आवश्यकता पूर्ति में उपयोगी सिद्ध हुई है। समेकित ग्रामीण ऊर्जा कार्यक्रम का उद्देश्य पारम्परिक एवं गैरपारंपरिक तरीके के ऊर्जा स्रोतों के एक साथ प्रयोग के द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करना।

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