भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन-2
31 दिसम्बर 1600ई0 को इंग्लैण्ड की रानी एलिजाबेथ प्रथम ने एक आज्ञा पत्र द्वारा ईस्ट इंडिया कम्पनी को पूर्वी देशों के साथ व्यापार करने का एकाधिकार प्रदान किया।
मुगल दरबार (जहाँगीर) में पहॅँचने वाला प्रथम अंग्रेज कैप्टन हाकिन्स था। जहाँगीर ने इसे 400 का मनसब और फिरंगी खाँ की उपाधि दिया था।
कैप्टन हाकिन्स को फारसी भाषा का ज्ञान था और उसने अपना पक्ष जहाँगीर के दरबार में फारसी भाषा में ही रखी।
1615ई0 में सम्राट जेम्स प्रथम ने सर टामस रो को अपना राजदूत बनाकर जहाँगीर के दरबार में भेजा।
अंग्रेजों की प्रथम व्यापारिक कोटी 1608ई0 सूरत मे स्थापित की गयी।
1611ई0 में अंग्रेजों ने मुसली पट्टम में फैक्ट्री स्थापित की।
1661ई0 में इंग्लैण्ड के सम्राट चाल्र्स द्वितीय का विवाह पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन से होने के कारण चाल्र्स को दहेज के रूप में बम्बई प्राप्त हुआ।
1668ई0 में चाल्र्स ने बम्बई को दस पौंड के वार्षिक किराये पर दे दिया।
1698ई0 में अंग्रेजी ईस्ट इंडिया कम्पनी ने तीन गाँव सुतानाती, कालीकट, एवं गोबिन्दपुर की जागीर दी। 1200रूपये के बदले प्राप्त कर ली यहाँ पर फोर्ट विलियम का निर्माण किया। बाद में यही कलकत्ता नगर कहलाया।
कलकत्ता नगर की नींव जाब चारनौक ने रखी। चाल्र्स आयर इसका पहला प्रेसीडेन्ट हुआ। 1700 में इसे पहला प्रेसीडेन्सी नगर घोषित किया गया।
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