भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन-3

भारत में यूरोपीय व्यापारिक कम्पनियों का आगमन-3

      फ्रांस के सम्राट लुई ग्प्ट के समय उसके मंत्री कोल्वर्ट के प्रयास से 1664 में फ्रंसीसी व्यापारिक कम्पनी की स्थापना हुयी।

      भारत में फ्रांसीसियों की पहली व्यापारिक कोठी फ्रैंको कैरो द्वारा 1668ई0 में सूरत में स्थापित की गयी।

      1674ई0 में फ्रांसिस मार्टिन ने पांडेचेरी की स्थापना की।

      1760ई0 में अंग्रेजी सेना ने सर आयरकूट के नेतृत्व में वांडीवाश के युद्व में फ्रांसीसियों को बुरी तरह से हराया।

      कर्नाटक का युद्व अंग्रेज एवं फ्रांसीसी के बीच लड़ा गया।

      प्लासी का युद्व 23 जून 1757 ई0 को अंगेज सेनापति राबर्ट क्लाइव एवं बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला के बीच हुआ। जिससे नवाब का सेनापति मीर जाफर ने विश्वास घात किया जिससे नवाब पराजित हुआ।

      अंगेजोें ने मीरजाफर को 1760ई0 में हराकर मीरकासिम को बंगाल का नवाब बनाया।

      मीरकासिम ने अपनी मुर्शिदाबाद से राजधानी मुगेर स्थानांतरित की थी।

      बक्सर का युद्व 1764ई0 में अंग्रेज सेनापति हेक्टर मुनरो एवं मीर कासिम अवध के नवाब शुजाउद्दौला तथा मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय के बीच हुआ जिसमंे अंगेंज विजयी रहे।

      हैदरअली 1761ई0 में नंदराज का अन्त करके मैसूर का शासक बना।

      हैदरअली की मृत्यु 1782ई0 में द्वितीय आंग्ल मैसूर युद्व के दौरान हुयी।

      हैदरअली की मृत्यु के बाद उसका पुत्र टीपू सुल्तान मैसूर का शासक बना।

-शेष अगले भाग में

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