सिक्ख धर्म-1
सिक्ख धर्म की नींव गुरुनानक देव ने पंजाब में डाली थी।
गुरुनानक के अनुयायी सिक्ख कहलाये।
गुरुनानक का जन्म 1469ई0 में तलवंडी नामक ग्राम में हुआ था।
गुरुनानक ने नानक पंथ चलाया।
गुरुनानक की मृत्यु 1538ई0 में करतार में हुयी थी।
अंगद दूसरे गुरू थे इन्हंे गुरुमुखी लिपि का अविष्कारक माना जाता है।
इनका प्रारम्भिक नाम लहना था।
सिक्खों के तीसरे गुरू अमरदास (1552-74ई0) से अकबर ने भेट की थी।
गुरु की पुत्री बीबी भानी को कई गाँव दान में अकबर ने दिये।
अमरदास ने 22 गद्दी की स्थापना की।
अमरदास के दामाद रामदास ने 1574-81ई0 चैथे गुरु बने।
अकबर ने इन्हे 500 बीघा जमीन दी।
इन्होने अमृतसर नगर की स्थापना की और गुरु के पद को पैतृक बना दिया।
पाँचवे गुरु अर्जुनदेव (1581-1606ई0) हुये। इन्होंने स्वर्णमन्दिर की नीवं कादिरी सम्प्रदाय के मीयाँमीर द्वारा रखवायी थी
इन्होेने सिखों के धार्मिक ग्रन्थ आदि ग्रन्थ की रचना 1604 में की।
गुरू अर्जुन देव ने करतारपुर एवं तरन तारनपुर नामक नगर बनाया।
खुसरों के समर्थन के कारण जहाँगीर ने इन्हें मृत्यु दण्ड दे दिया।
सिक्खों के छठे गुरू हरगोबिन्द (1606-44ई0) हुये।
सिक्खों गुरू सातवें गुरू हरराय।
सिक्खों के आठवे गुरू हरकिशन हुयें इसकी मृत्यु चेचक से हो गयी थी।
सिक्खो के नवें गुरू तेगबहादुर (1664-75ई0) हुये।
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