सिक्ख धर्म-2
सिक्खों के अन्तिम एवं दसवें गुरू गुरूगोबिन्द सिंह (1675-1708ई0) हुये।
इनका जन्म पटना में हुआ था।
इन्होने सिक्खों के लिये पाँच ककार अनिवार्य किया, प्रत्येक को केश, कघा, कृपाण, कच्छा और कड़ा रखने की अनुमति दी।
गुरूगोबिन्द सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना 1699 ई0 में की थी।
पाहुल प्रणाली की शुरूआत गुरूगोबिन्द सिंह ने की थी।
गुरूगोबिन्द सिंह की हत्या 1708ई0में नाँदेड़ नामक स्थान पर गुलखाँ नामक पठान ने कर दी।
बन्दा बहादुर (1708-1716ई0) इसके बचपन का नाम लक्ष्मणदेव था।
बन्दा बहादुर का जन्म जम्मू के रजौली गाँव में हुआ था।
बंदा का उद्देश्य पंजाब मंे एक सिंख राज्य स्थापित करने का था इन्होने लौहगढ़ को राजधानी बनायी।
बंदा बहादुर ने गुरूनानक एवं गुरूगोबिन्द सिंह नाम के सिक्के चलवाये।
बंदा बहादुर को उसके शिष्य सच्चा पादशाह या सच्चा सम्राट कहते थे।
मुगल सम्राट फर्रूख्शियर के आदेश पर 1716ई0 में मृत्यु दण्ड दे दिया गया।
बन्दा बहादुर की मृत्यु के बाद सिंक्ख नेतृत्व विहीन हो गये।
कपूर सिंह ने दल खालसा का गठन किया।
रणजीत सिंह का जन्म गुंजरावाला में 2 नवम्बर 1780ई0 को हुआ था। यह सुकरचकिया मिसल का था।
1791ई0 मंे रणजीत सिंह लाहौर का शासक बना।
1809ई0 मंे रणजीत सिंह एंव चाल्र्स मेटकाफ के बीच अमृतसर की सन्धि हुयी।
रणजीत सिंह का साग्राज्य चार सूबो में बटा था-पेशावर, कश्मीर, मुल्तान एवं लाहौर।
रणजीत सिंह को अफगान शासक शाहसुजा से वह प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा प्राप्त हुआ। जिसे नादिर शाह लाल किले से लूट कर ले गया था।
9 जून 1839ई0 को रणजीत सिंह की मृत्यु को गयी।
प्रथम आंग्ल सिक्ख युद्व(1845-46ई0)।
द्वितीय आंग्ल सिक्ख युद्व (1848-49ई0)।
30 मार्च 1849ई0 को चार्स नेपियर के नेतृत्व मंे पंजाब को अग्रेजी राज्य में मिला था।
लार्ड डलहौजी उस भारत का गवर्नर जनरल था।