अलीगढ़ आंदोलन

  • जो कार्य हिंदू धर्म और समाज के लिए राजा राममोहन राय ने किया था ,वही कार्य मुस्लिम धर्म और समाज के लिए सैयद अहमद खान ने किया था।
  • सैयद अहमद खां के आंदोलन की गतिविधियों का केंद्र अलीगढ़ होने के कारण उनके आंदोलन को अलीगढ़ आंदोलन कहकर भी पुकारा जाता है।
  • सैयद अहमद खान सन 1857 के विद्रोह के समय बिजनौर में सदर अमीन के पद पर कार्यरत थे। यह पहले ऐसे भारतीय थे, जिन्होंने 1857 के विद्रोह से संबंधित एक प्रसिद्ध पुस्तक की रचना की थी।  जिसे असबाब- बगावत -ए -हिंद कहकर पुकारा जाता है। इसका इंग्लिश अनुवाद द कॉसेस ऑफ द इंडियन म्युटिनी के नाम से हुआ।
  • सर सैयद अहमद खान ने 1864 में एक संस्था की स्थापना गाजीपुर में की थी , जिसका उद्देश्य अंग्रेजी भाषा में लिखित पुस्तकों का उर्दू भाषा में अनुवाद करना था।
  • सैयद अहमद खां के प्रारंभिक विचार किसी सांप्रदायिक भावनाओं से प्रेरित नहीं थे। उन्होंने एक बार कहा था-' क्या हम एक ही धरती पर निवास नहीं करते, क्या हम एक ही धरती पर चलाए या दफनाये नहीं जाते, याद रखिये भिन्न-भिन्न धर्म को मानते हुए भी हम सब भारत की दो सुंदर सुंदर आंखें हैं।' परंतु बाद में अहमद के विचार सामुदायिक हो गए।
  • सैयद अहमद खान ने 24 मई 1875 को महारानी विक्टोरिया के जन्मदिवस पर अलीगढ़ में एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज की स्थापना की, जो कि 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के रूप में तब्दील हुआ।
  • सर सैयद अहमद खान ने मुसलमानों की राज भक्ति को प्रदर्शित करने के लिए राज भक्त मुसलमान नामक एक अत्यंत प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की।  उन्होंने तहजीब उल- अखलाक नामक एक प्रसिद्ध ग्रंथ की रचना की, जिसका तात्पर्य है सभ्यता और नैतिकता। उनका सबसे महत्वपूर्ण कार्य कुरान पर टीका लिखना था।
  • सैयद अहमद खान ने 1888 ई में एक नवीन संस्था यूनाइटेड इंडिया पेट्रियोटिक एसोसिएशन की स्थापना की,  जिसका उद्देश्य कांग्रेस की स्थापना और उसके प्रत्येक प्रगतिशील कदमों का विरोध करना था। 
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