1857 के विद्रोह के असफलता के प्रमुख कारण निम्नलिखित थे ।
1- विद्रोह का सीमित क्षेत्र में ही फैलना -
1857 के विद्रोह भारत के कुछ क्षेत्रों तक सीमित रहा और इसमें अखिल भारतीय आंदोलन का रूप कभी धारण नहीं किया विद्रोह के समय अधिकांश देश में पूर्ण शांति रही या विद्रोह केवल उत्तरी भारत तक ही सीमित रहा दक्षिण भारत पंजाब राजपूताना महाराष्ट्र आदि के कुछ छिटपुट घटनाओं के अतिरिक्त कुछ भी नहीं हुआ सिखों तथा गौरखो ने अंग्रेजों का पूरा साथ हैदराबाद के निजाम ने एक विद्रोहियों का साथ दे दिया होता तो विद्रोह दक्षिण भारत में फैलकर अंग्रेजों के लिए एक गंभीर संकट उपस्थित कर देता है इसी प्रकार यदि सिंधिया विद्रोहियों से मिल जाती तो उत्तरी भारत में भी अंग्रेजों की स्थिति और अधिक संकटपूर्ण हो जाती ।
2- विद्रोहियों के सीमित साधन -
अंग्रेजी की अपेक्षा विद्रोहियों के साधन अत्यंत सीमित थे विद्रोहियों के पास पर्याप्त मात्रा में हथियार नहीं थे और उन्हें तलवार भाले आदि पर निर्भर रहना पड़ता था जबकि अंग्रेजों के पास बहुत बड़ी संख्या में बढ़िया राइफलए और तोपों थी अंग्रेजों ने तार- डाग व्यवस्थाओं का भी विद्रोह दबाने मे काफी लाभ उठा ।
3- अंग्रेजों की अनुकूल परिस्थितियां -
1857 में अंग्रेजों की परिस्थितियों ने भी साथ दिया उस समय तक क्रीमिया और चीन के युद्ध में अंग्रेज सफलता प्राप्त कर चुके थे और भारत में उनका प्रभाव स्थापित हो गया था जिससे वह रूस और फारस की ओर से निश्चिंत रहें अफगानिस्तान के दोस्त मोहम्मद से भी अंग्रेजों ने उस समय मैत्रीपूर्ण संबंध थे इस प्रकार चारों ओर से निश्चिंत होकर अंग्रेज अपना पूरा बल इस विद्रोह के दमन में लगा सके ।