1857 का विद्रोह - 14

4- शिक्षित वर्ग का उदासीनता -

                                            समाज के शिक्षित वर्ग के सहयोग व नेतृत्व के अभाव में कोई विद्रोह  या आंदोलन सफल नहीं हो सका 1857 के विद्रोह में ना तो भारत के शिक्षित वर्ग ने भाग लिया और ना ही समर्थन व नेतृत्व किया भारत में शिक्षित वर्ग को विद्रोहियों के अनेक कार्यक्रम व नीतियां पसंद नहीं आई जैसे अंग्रेजी व वैज्ञानिक शिक्षा, रेल, डाक तार आदि का विरोध शिक्षित वर्ग को विरोध । इस शिक्षित वर्ग को नेतृत्व सामंतों के हाथों में होने में भी अखरा क्योंकि वह उन्हें प्रतिक्रियावादी समझते थे उन्हें भय था कि सफल होने पर यह सामंत पुरानी व्यवस्था ही देश पर थोप देंगे और विधि के शासन का अंत हो जाएगा भारत का शिक्षित वर्ग बाद में राष्ट्रीय आंदोलन का नेता बना किन्तु 1857 में यह वर्ग विद्रोह के प्रति उदासीन ही रहा वास्तव में यह वर्ग पाश्चात्य सभ्यता शिक्षा विज्ञान साहित्य शासन पद्धति आज की अच्छी बातें ग्रहण करते हुए अंग्रेजों से राजनीतिक आधार पर लड़ना चाहता था ।

5- क्रांति के समय पहले से आरंभ होना -

                                                        क्रांतिकारी नेताओं के अनुसार 31 मई 1857 का विद्रोह का प्रारंभ किया जाना था परंतु चर्बी वाले कारतूस ओं के कारण मंगल पांडे नामक सैनिक 29 मार्च 1857 का विद्रोह कर दिया 10 मई 1857 को विद्रोह शुरू हो गया इस प्रकार निर्धारित इससे पहले ही विद्रोह प्रारंभ हो गया जिससे अंग्रेजों को समझने का अवसर मिल गया और क्रांतिकारी कि समस्त योजनाएं  अस्त-व्यस्त हो गई ।

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