वन्य प्राणी संरक्षण

  • पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में सहायक होने के कारण वन्य प्राणी बहुत महत्वपूर्ण प्राकृतिक संसाधन है।
  • यह प्राकृतिक सौंदर्य में भी वृद्धि करते हैं।
  • राष्ट्रीय पार्क तथा वन्य प्राणी अभयारण्य मनोविनोद तथा पिकनिक के लिए महत्वपूर्ण स्थल होते हैं, लेकिन खेद की बात है कि वन्य प्राणियों की जातियां तथा इनके क्षेत्र तेजी से कम होते जा रहे हैं ।अतः इनका संरक्षण अति आवश्यक है ।
  • वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए निम्नलिखित उपाय महत्वपूर्ण भूमिका अदा करते हैं :
  1.  वन्य प्राणियों की शिकार पर कठोरता से प्रतिबंध लगाया जाए।
  2. चोरी छिपे पेेड़ काटने वाले लोगों तथा गैर कानूनी रूप से वनों में प्रवेश करने वाले शिक्षकों की कठोर दंड की व्यवस्था की जाए।
  3. अन्य राष्ट्रीय पार्कों तथा वन्य प्राणी अभ्यारण की स्थापना की जाए।
  4. वर्तमान राष्ट्रीय प्राणी अभ्यारण का विकास किया जाए और अधिक सुविधाएं बढ़ाई जाए।
  5. प्राणियों में प्रतिबंधित प्रजनन को प्रोत्साहन दिया जाए ।
  6. वन्य प्राणियों के स्वरूप में सुधार के लिए विचार गोष्ठीओं कार्यशालाओ का आयोजन किया जाए ।
  7. राष्ट्रीय प्राणी अभयारण्य में स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार किया जाए, उससे वन्य प्राणियों के स्वास्थ्य में सुधार होगा।
  8. राष्ट्रीय अभयारण्यों के वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए समुचित दशाओं को बढ़ाया जाए।

1983 में एक राष्ट्रीय वन्य प्राणी कार्य योजना बनाई गई है , उसकी अंतर्गत विभिन्न कार्यक्रमों तथा परियोजनाओं पर कार्य किया जा रहा है । जिससे निकट भविष्य में वन्य प्राणियों का समुचित संरक्षण हो सके।  सरकार द्वारा वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए उठाए गए कदमों में निम्नलिखित कदम महत्वपूर्ण है :-

  •   वन्य प्राणियों के संरक्षण के लिए सभी राष्ट्रीय पार्कों तथा वन्य प्राणी अभ्यारणयो का सर्वेक्षण किया जा रहा है।
  • वन्य प्राणी अभयारण्य के समुचित प्रबंधन के लिए बनाई जाने वाली परियोजना के लिए दिशा-निर्देश तैयार की जा रही है।
  • सभी राज्य तथा केंद्र शासित प्रदेश को दिशा-निर्देश भेजा जाएगा।
  • राष्ट्रीय वन नीति 1952 में परिवर्तन करके राष्ट्रीय वन नीति 1988 की घोषणा की गई, इसके अंतर्गत वन्य प्राणी संरक्षण को प्राथमिकता प्रदान की गई है।
  • वन्य प्राणी संरक्षण अधिनियम 1972 को संशोधित किया गया।
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